Garhwa : दो नाबालिग लड़कियों के साथ हैवानियत करने वाले गुनहगार इरशाद अंसारी को अदालत ने ऐसी सजा सुनाई है, जो समाज को साफ संदेश देती है दरिंदगी की कोई माफी नहीं। इसमें एक विक्षिप्त लड़की भी थी। गढ़वा के विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) दिनेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को रंका थाना क्षेत्र के दौनादाग निवासी इरशाद अंसारी को सश्रम आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया। जुर्माना नहीं भरने पर 1 साल अतिरिक्त साधारण कारावास काटनी होगी। यह मामला रंका थाना (कांड संख्या 178/2022) से जुड़ा है। 4 अक्टूबर 2022 को नावादोहरी निवासी लाल मुनी प्रजापति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे पहले अदालत ने 10 गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िताओं के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया।
दर्ज FIR के अनुसार, 3 अक्टूबर 2022 को उनकी नाबालिग बेटी और नतिनी रंका सब्जी बाजार में दीया-कलश बेचने गईं थी। शाम तक घर नहीं लौटीं। तलाश के दौरान पता चला कि एक नाबालिग ने किसी अज्ञात नंबर पर फोन किया था।
शक गहराया और वही शक सच निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी इरशाद अंसारी दोनों नाबालिगों को मोटरसाइकिल से जंगल ले गया। कई बार उनके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उन्हें बंद कमरे में कैद रखा। दुर्गा पूजा की भीड़ का फायदा उठाकर एक नाबालिग किसी तरह जान बचाकर भाग निकली, लेकिन दूसरी नाबालिग जो विक्षिप्त भी थी, उसके साथ आरोपी ने लगातार दुष्कर्म किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले भी 2019 में दुष्कर्म के आरोप में जेल जा चुका है, जेल से छूटने के बाद उसने नाम बदलकर ‘सोनू कुमार’ रख लिया। इसी फर्जी पहचान से वह मोबाइल पर संपर्क करता था। दोनों लड़कियों को राज्य से बाहर ले जाने की साजिश भी रच रहा था। अदालत में लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने कहा, “यह फैसला न्याय की जीत है। विक्षिप्त और नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी का यही हश्र होना चाहिये।” बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार चौबे ने पैरवी की।






