Kohramlive desk: चीनी का इस्तेमाल खान-पान की चीज़ों में मिठास देने के लिए किया जाता है। बहुत सारी चीजों में इसका का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मिठाई बनाने में, खीर में। चीनी के बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल किया जाता है। बता दे कि भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है। गन्ने से चीनी बनाने के लिए सबसे पहले गन्ने का रस निकाला जाता है। चीनी बनाने की प्रकिया के दौरान गन्ने के रस में सल्फर डाई आक्साइड, फोस्फोरिक एसिड आदि मिलाकार रिफाइन किया जाता है।
चीनी को बनाया जाता है तो उसे कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है और उस समय बहोत सारे Chemical का इस्तेमाल किया जाता है और जब चीनी बन जाती है तो सफेद नही बल्कि भूरे रंग की होती है। चीनी बनाने की प्रकिया के दौरान गन्ने के रस में सल्फर डाई आक्साइड, फोस्फोरिक एसिड आदि मिलाकार रिफाइन किया जाता है।
चीनी खाना कितना नुकसानदायक
- चीनी खाना हमारे खून को काफी गाढ़ा बना देती है। खून गाढ़ा होने के कारण हामरे शरीर के कई भागों में पहुंच नहीं पाता है। जिस कारण दांतो और हड्डियों में कई तरह के रोग पैदा हो जाते हैं।
- खून में शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक होने पर ग्लूकोस कोशिकओं के प्रोटीन से चिपक कर कोशिकाओं की क्रियाओं को बिगाड़ देता है। जिसके कारण गुर्दे की बीमारियां, आँखों के रोग और शरीर के अंगों को काटने तक की नौबत आ जाती है।
- खून में चीनी की मात्रा सामान्य से ज्यादा होने पर जब कोशिकाएं मरती है तो कोशिकाओं के DNA और RNA का रूपांतरण urines में हो जाता है और urine से यूरिक एसिड उत्पन्न होता है।
- ये यूरिक एसिड nitric oxide को घटा कर बढ़ा देता है इस वजह से रक्त नलिकाओं के smooth muscle cells सिकुड़ जाते हैं और रक्त चाप बढ़ जाता है। बता दें कि ये प्रक्रिया गुर्दे खराब होने का कारण बनती है। इस प्रकार यूरिक एसिड के ह्रदय रोग, उच्च रक्त चाप, मोटापा, स्ट्रोक आदि का कारण बनता है।
- चीनी के पाचन के समय उत्पन्न होने वाले विषैले तत्व हमारे मस्तिष्क व् नाडी संस्थान में इक्कठे हो जाते हैं जिसके कारण इन भागों की कोशिकाएं मर जाती हैं, जिससे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के रोग होते हैं।
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