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Smiley Face :जानिए कौन है ‘स्माइली’ के जनक और इसके बनने के पीछे की दिलचस्प कहानी

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सोशल मीडिया के ज़माने में जहां लोगों के पास वक्त की कमी है, इमोजी उनकी हर भावना को व्यक्त करने का एक सरल, बिना समय की बर्बादी और किफायती माध्यम बन गया है. दुनिया में सबसे पहला इमोजी स्माइली बनाया गया था. आज हम आपको इस स्माइली बनाने के पीछे की दिलचस्प कहानी के बारे में बताएंगे.

हार्वी ने इस समस्या से निपटने के लिए एक नायाब तरीके का इजात किया जिसे हम और आप स्माइली के नाम से जानते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इस स्माइली को तैयार करने के लिए उन्हें 45 डॉलर यानी आज के हिसाब से तकरीबन 3 हज़ार रुपए मिले थे. (image credit: Facebook.com)
पीले रंग का ये हंसता हुआ चेहरा रूठे कर्मचारियों को मनाने के लिए बनाया गया था. ये स्माइली इतना पसंद किया गया कि दुनियाभर में मशहूर हो गया. 1971 में 5 करोड़ स्माइली फेस छपे बटन बेचे गए थे. यहां तक की इसको मशहूर होते देख 1999 में यूएस पोस्टल सर्विस डिपार्टमेंट ने स्माइली फेस स्टांप भी जारी किया था. हालांकि स्माइली के फेमस होने के बाद हार्वी ने इसका पेटेंट नहीं करवाया था. (image credit: pixabay.com)
समय-समय पर भले ही हार्वी रॉस के स्माइली बनाने के दावे को कई लोगों ने झुठला दिया था, लेकिन इतिहासकार मानते हैं कि स्माइली की खोज हार्वी ने ही की थी. उनके इस दावे की पुष्टि स्टेट म्युचुअल लाइफ के पास मौजूद फोटो और डॉक्यूमेंट्स भी करते हैं. (image credit: pixabay.com)
2001 में हार्वी बॉल की मृत्यु हो गई तब उनकी उम्र 79 वर्ष थी. अपने अंतिम दिनों तक वो अपनी एडवरटाइजिंग एजेंसी संभाल रहे थे. एडवरटाइजिंग एजेंसी शुरू करने से पहले वो दूसरे विश्व युद्ध में सेना में रहे थे. (image credit: Facebook.com)
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