Kohramlive : असम की हरियाली से घिरे चाय बागानों के बीच मंगलवार को एक अलग ही दृश्य था। चाय की पत्तियों की खुशबू के बीच हजारों आदिवासी भाई-बहन अपने अधिकारों की बात सुनने जुटे थे। मंच पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन थे। असम के Biswanath Chariali स्थित Mekijajan Tea Estate में आयोजित इस जागरूकता जनसभा में CM हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज की पहचान, अधिकार और संघर्ष की लंबी कहानी सुनाई और एकता का संदेश दिया। CM हेमंत सोरेन ने कहा कि असम में रहने वाला आदिवासी समुदाय सदियों से देश के चाय उद्योग की असली ताकत रहा है। हजारों साल से आदिवासी समाज चाय उद्योग से जुड़ा है। उनकी मेहनत से ही असम की चाय दुनिया भर में पहचान बनाती है। लेकिन मेहनत के बदले उन्हें जो मिलता है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। CM हेमंत सोरेन ने झारखंड आंदोलन का जिक्र करते हुये कहा कि जल-जंगल-जमीन और आदिवासी पहचान के लिये झारखंड में भी लंबा संघर्ष हुआ। उन्होंने कहा कि जब वर्षों तक न्याय नहीं मिला तो महान नेता शिबू सोरेन और अनेक क्रांतिकारियों ने अलग राज्य की लड़ाई छेड़ी। करीब 50 साल तक संघर्ष चला। कई आंदोलनकारी शहीद हुये। कई लोग जेल गये, लेकिन आदिवासी समाज पीछे नहीं हटा, इसी संघर्ष की परिणति के रूप में झारखंड राज्य का निर्माण हुआ। CM ने कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि बौद्धिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत बने। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को अपने अस्तित्व और पहचान की रक्षा के लिये एकजुट रहना होगा। संविधान में मिले अधिकारों के लिये जरूरत पड़े तो कानूनी लड़ाई भी लड़नी होगी। समाज को शिक्षा और जागरूकता के जरिये आगे बढ़ना होगा।
असम के आदिवासियों को क्यों नहीं मिला दर्जा?
CM हेमंत सोरेन ने सवाल उठाया कि हजारों वर्षों से असम में रहने के बावजूद कई आदिवासी समुदायों को अब तक आदिवासी का दर्जा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बदलनी होगी और इसके लिये समाज को चट्टान की तरह एकजुट होना पड़ेगा। CM हेमंत सोरेन ने कहा कि असम प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर राज्य है और पर्यटन के क्षेत्र में यहां अपार संभावनायें हैं। यदि यहां के लोगों को उनका अधिकार और सम्मान मिले तो यह राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है। सभा के अंत में CM हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज को संदेश देते हुये कहा कि यह समुदाय कभी किसी का बुरा नहीं चाहता, लेकिन अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करना भी जानता है।
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