Kohramlive : इस माह की पूर्णिमा दो दिन यानी 21-22 जून को रहेगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संत कबीर दास जी की जयंती भी मनाई जाती है। जयंती 22 जून को मनाई जायेगी। ये पूर्णिमा धर्म-कर्म के नजरिये से बहुत खास है। इस दिन पूजा-पाठ, नदी स्नान के साथ ही भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने और सुनने की भी परंपरा है।
ज्योतिष के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किये गये धर्म-कर्म से अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है। हिन्दी पंचांग में एक साल में 12 पूर्णिमा होती हैं। पूर्णिमा पर ही महीना खत्म होता है। इस तिथि पर जो नक्षत्र रहता है, उसी के आधार पर महीनों के नाम रखे गये हैं। जैसे ज्येष्ठ पूर्णिमा पर ज्येष्ठा नक्षत्र रहता है। हिन्दी पंचांग की सभी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान को शुभ माना गया है। जो लोग नदी नहीं जा सकते, उन्हें करते समय नदियों का और तीर्थों का ध्यान करना चाहिये। पूर्णिमा पर दिन की शुरुआत सूर्य पूजा के साथ करनी चाहिये। सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ायें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। पूजा-पाठ और देवताओं का अभिषेक भी फलदायक माना गया है।
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