Ranchi : झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने आज अपनी मांगों को लेकर सीएम हेमंत सोरेन को एक ईमेल के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने ज्ञापन के संबंध में बताया कि CM को भेजे गए पत्र में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण जिसमे वर्षों से आयोग के अध्यक्ष /मेम्बर के बहाल नही होने से अभिभावकों को काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। इसके गठन की मांग के साथ-साथ झारखंड शिक्षा संशोधन अधिनियम 2017 को पूरे तरीके से राज्य के सभी जिलों के प्राइवेट स्कूलों में लागू कराए जाने की मांग की गई है।
पत्र में लिखा है कि
झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 झारखंड के सभी प्राइवेट स्कूलों पर पुर्णतः प्रभावी है और अधिनियम की कंडिका 7(1) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि हर स्कूल के अंदर शुल्क निर्धारण समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाना है। जिसमें स्कूल एडमिशन के साथ-साथ अभिभावक के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे और उस समिति के अनुशंसा पर ही कोई शुल्क में बढ़ोतरी की जा सकती है। और उसमें भी 2 वर्ष के अंदर 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। अगर शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है तो उसकी अनुशंसा जिला कमेटी के पास की जाएगी । जिसके अध्यक्ष सम्बंधित जिले के उपायुक्त होंगे। इसके बावजूद भी आज राज्य के राजधानी रांची सहित सभी जिलों में प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से शुल्क में वृद्धि कर इस अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस पर किसी का कमांड नही है। सभी प्राइवेट स्कूल द्वारा कोरोना काल में भी 40-50% शुल्क में वृद्धि कर अभिवावकों का शोषण किया जाता रहा है। वहीं झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण(जेट) के चेयरमैन सहित सदस्य की सीट खाली होने से कोई भी अभिभावक अपनी फरियाद जेट में दर्ज नहीं करा सकता इसको भी सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।
यह है मांगें
1. सभी निजी विद्यालय में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 को पूर्णतः लागू कराई जाए।
2. झारखंड सरकार द्वारा जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट(एनओसी) का पालन पूरी तरह किया जाए। जिसके तहत स्कूल नो प्रॉफिट नो लॉस का बैलेंस शीट( सीए द्वारा जारी किया गया प्रत्येक वर्ष का लेखा-जोखा) हर वर्ष सरकार को उपलब्ध कराएं
3. कोई भी विद्यालय शिक्षण शुल्क के कारण बच्चों को क्लास से वंचित नहीं करे।
4 अपने ही विद्यालय के छात्रों को अगली कक्षा में अथवा किसी कक्षा में री एडमिशन (Re-Admission, Development Charge, Annual Fee) लेना बंद करने का निर्देश देते हुए उनसे वर्तमान सत्र एवं विगत सत्र में वसूल की गई राशि वापस करवाने का संकल्प निर्गत करें ।
5 सीबीएसई, आईसीएसई, राज्य बोर्ड द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस को विद्यालय अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना सुनिश्चित करे ।
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