Kohramlive : मिडिल ईस्ट तनाव के बीच LPG की किल्लत ने लोगों को इंडक्शन स्टोव की ओर मोड़ दिया है। वहीं, नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। नॉन-स्टिक बर्तन आमतौर पर टेफ्लॉन (PTFE) कोटिंग से बने होते हैं।
सामान्य तापमान पर ये सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन अत्यधिक गर्म होने पर हानिकारक रसायन निकल सकते हैं। ये रसायन खाने में मिलकर शरीर में पहुंच सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिये ज्यादा जोखिम है।
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LPG की तुलना में इंडक्शन खाने को करते हैं प्रभावित
तेज तापमान और खराब कोटिंग से विटामिन C, B12 और एंटीऑक्सीडेंट्स नष्ट हो सकते हैं। खाने का स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित होती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लगातार ऐसा खाना खाने से शरीर में कमजोरी और इम्यूनिटी कम हो सकती है।गलत तरीके से लगातार इस्तेमाल करने पर लीवर और किडनी पर असर, मेटाबॉलिज्म कमजोर एवं हार्मोनल असंतुलन की आशंका रहती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिरेमिक कोटेड बर्तन बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
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मीडियम फ्लेम पर ही खाना बनायें। धातु के चम्मच से खरोंचने से बचें। खाली बर्तन को ज्यादा देर तक गर्म न करें। ध्यान रहे कि नॉन-स्टिक बर्तन पूरी तरह खराब नहीं हैं, बस सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है, वरना यही सुविधा धीरे-धीरे नुकसान में बदल सकती है।
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