TRENDING : अक्सर लोग पार्टी वगैरह में देर रात तक तेज आवाज में म्यूजिक बजाते हैं और खुशी मनाते हैं। वे ऐसा नहीं सोचते कि उनके ऐसा करने से किसी और को परेशानी होती है। ऐसा करने से यदि किसी को परेशानी हो और उसने पुलिस में शिकायत कर दी तो उस पर कार्रवाई भी हो सकती है। अतः नए साल के जश्न की बात हो या शादी विवाह में आयोजित पार्टी की, हमें यह समझना चाहिए की तेज म्यूजिक बजाना यह हुड़दंग करना कानूनी दृष्टि से गलत है और इसके खिलाफ शिकायत होने पर कार्रवाई भी हो सकती है।
कानूनी अधिकार और प्रावधान को जानना जरूरी
अगर आप भी ऐसी परेशानी से दो चार होते हैं, तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं,क्योंकि भारतीय कानून की मदद से आप किसी को भी लाउड म्यूजिक बजाने से रोक सकते हैं। हमारे देश में लाउड म्यूजिक बजाना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को जुर्माना भरना पड़ सकता है। मामला गंभीर होने पर आरोपी को जेल भी जाना पड़ सकता है। इसके लिए बकायदा आईपीसी में प्रावधान दिया गया है।
जानें आईपीसी की धारा 268, 290, 291 क्या कहती है
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 268 में लाउड म्यूजिक बजाना पब्लिक न्यूसेंस की श्रेणी में आता है, जो कानूनन एक अपराध है। आईपीसी की धारा 290 में इस जुर्म के लिए जुर्माने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, अगर कोई शख्स एक बार कार्रवाई होने पर भी दोबारा लाउड म्यूजिक और लाउडस्पीकर बजाता है, और उससे किसी को परेशानी होती है, तो ऐसे शख्स के खिलाफ फिर से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी बार ऐसा करने पर आरोपी को जुर्माना तो भरना ही होगा, साथ ही उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।
पर्यावरण संरक्षण कानून
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) अधिनियम 2000 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 भी लाउड म्यूजिक या स्पीकर बजाने को गैर कानूनी करार देता है और इसे दंडनीय अपराध बताया है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) अधिनियम के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड म्यूजिक या स्पीकर बजाने की इजाजत नहीं है। हालांकि कम्युनिटी सेंटर, बैंकेट हॉल, ऑडिटोरियम, कांफ्रेंस रूम या इसी तरह के बंद कमरों या बड़े हॉल में लाउड म्यूजिक बजाया जा सकता है। अगर कोई रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड म्यूजिक या स्पीकर बजाना चाहता है, तो इसके लिए प्रशासनिक अनुमति ज़रूरी है।
सीआरपीसी की धारा 107
पार्टी या जश्न के दौरान शोर मचाकर हल्ला गुल्ला करना, हुड़दंग मचाना, जिससे किसी को परेशानी हो या शांति भंग होने की आशंका हो, वो अपराध की श्रेणी में आता है। सीआरपीसी में ऐसा करने वालों के खिलाफ धारा 107 के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है। इस धारा का इस्तेमाल अन्य मामलों में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा से जुड़ा है। जब एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति द्वारा शांति भंग करने या सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई गलत कार्य करने की संभावना है, जो संभवतः शांति भंग का कारण बन सकता है या सार्वजनिक शांति भंग कर सकता हैऔर उनकी राय है कि कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार है, तो इस धारा का इस्तेमाल किया जाता है। मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से यह कारण बताने की अपेक्षा कर सकता है कि उसे जमानत के साथ या उसके बिना मुचलका भरे जाने का आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।
सीआरपीसी की धारा 116
सीआरपीसी की धारा 116 के तहत मजिस्ट्रेट हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ कथित अपराधों की जांच करेगा। मजिस्ट्रेट आरोपी व्यक्ति को एक बांड पर हस्ताक्षर करने के लिए कह सकता है कि वे अपराध नहीं करेंगे। ऐसे मामले की जांच 6 महीने के भीतर पूरी करनी होती है।
आबकारी अधिनियम
इसके अलावा यदि कोई हुड़दंग मचाते वक्त शराब का सेवन किए हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाती है। दोषी पाए जाने पर इस अधिनियम के तहत भी जुर्माने और सजा दोनों का प्रावधान है।
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