spot_img
spot_img
spot_img

‘जल है तो कल है और मिट्टी है तो जीवन है’

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Garhwa(Nityanand Dubey) : ‘जल है तो कल है और मिट्टी है तो जीवन है’—इसी संकल्पना के साथ गढ़वा के चिनियां प्रखंड में तीन दिवसीय ग्राम स्तरीय जलछाजन परियोजना जागरूकता अभियान बुधवार को खत्म हो गया। इस अभियान का मुख्य मकसद जल संरक्षण, मृदा प्रबंधन और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना था। गढ़वा के DC शेखर जमुआर ने बताया कि गढ़वा की भौगोलिक संरचना और बेमौसम बारिश के क्षेत्र में सूखे की समस्या बनी रहती है। ऐसे में जलछाजन कार्यक्रम वर्षा जल प्रबंधन और संसाधनों के उचित उपयोग के माध्यम से ग्रामीण विकास को गति देने में सहायक साबित होगा।

अभियान के अंतिम दिन ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और टिकाऊ खेती पर अपने विचार साझा किये। इस मौके पर मुखिया चिनियां, जिला तकनीकी विशेषज्ञ प्रमोद सेठ, डीआरडीबी के कार्यालय प्रबंधक मिथिलेश कुमार और सहायक मुकेश कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अभियान के समापन कार्यक्रम में मुख्य रूप से गढ़वा विधायक सतेंद्रनाथ तिवारी, उपायुक्त शेखर जमुआर और दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेन्नी हेंब्रम उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत झारखंड जलछाजन मिशन, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार द्वारा किया गया, जिसे वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी वन प्रमंडल, गढ़वा ने क्रियान्वित किया।

इस अभियान की प्रेरणा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बीते 5 फरवरी को मध्य प्रदेश के शिवहर जिले से शुरू की गई वाटरशेड यात्रा महोत्सव से ली गई। इसी कड़ी में झारखंड जलछाजन मिशन द्वारा इसे रांची से शुरू किया गया। जलछाजन परियोजना का उद्देश्य—

  • मृदा एवं जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना।
  • उपजाऊ मिट्टी, भू-गर्भ जल, जंगल और पशुधन का उचित प्रबंधन करना।
  • खेती एवं आजीविका को उन्नत कर ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाना।

गढ़वा में जलछाजन की विशेषतायें

इस अभियान के तहत चिनियां प्रखंड के छह पंचायतों के 17 गांवों में जलछाजन परियोजना को लागू किया गया। गढ़वा विधायक सतेंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि जलछाजन कार्यक्रम के माध्यम से—

  • जल, जंगल, जमीन और पशुधन का संरक्षण एवं विकास किया जा सकता है।
  • पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिलेगी।
  • वर्षा जल का संरक्षण और भू-जल स्तर को बढ़ावा मिलेगा।
  • नवीन कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ जीविकोपार्जन सुनिश्चित किया जायेगा।

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

AI से पहले ही खत्म हो चुकी थीं ये नौकरियां,  कभी रोजी-रोटी थीं…

Kohramlive : AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दौर में अक्सर यह...

शादी में जाना था, मौत ने रास्ते में रोक लिया… एक साथ बुझ गये 3 चिराग

Lohardaga : एक शादी समारोह में शामिल होने निकले...

21 जून को छुट्टी नहीं! योग दिवस पर खुलेंगे झारखंड के सभी सरकारी स्कूल…

Ranchi : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अवसर पर झारखंड...