Khunti : वह औरत, जो सिर्फ जीना चाहती थी, सुबह की किरणें जब गांव की हरियाली पर गिर रही थीं, तभी एक चीख ने सन्नाटा चीर दिया। बुधनी हुन्नी पुर्ति – एक 40 साल की स्त्री, मृत पाई गई। उसका शरीर खून से लथपथ था और चेहरे पर छपी थी दर्दनाक चीख की आखिरी परछाईं। बुधनी कोई राक्षसी नहीं थी, वह सिर्फ एक औरत थी, जिसने शायद गांव की परंपराओं से अलग सोचना शुरू किया था। पर गांव ने उसे ‘डायन’ समझ लिया। वहीं, अंधविश्वास के मकड़जाल में जकड़े गिने-चुने कुछ लोगों ने उसे जीने नहीं दिया, बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। जैसे ही मुरहू थाना को खबर मिली, इंस्पेक्टर विमल और SI कंचन कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में छापामारी टीम बनी। तकनीक की आंख और खुफिया जानकारी की रीढ़ ने चार चेहरों की पहचान कर दी, एतवा उर्फ बट्टु – जिसकी आंखों में हिंसा का धुंआ भरा था। एरनियुस उर्फ ततउ – जो खुद को गांव का ‘न्यायप्रिय’ मानता था। गनसा उर्फ सेगा – जिसकी कुल्हाड़ी ने सबसे पहले चलकर खून बहाया। प्रवीण उर्फ टकलु – जो सिर्फ 22 साल का था, पर हाथों में थी हत्या की आदत। गिरफ्तार होते ही उन्होंने कबूल किया “हां, हमने उसे मारा, क्योंकि वह डायन थी।” इस बात का खुलासा आज खूंटी पुलिस ने मीडिया के सामने किया। बीते 6 मई को यह सनसनीखेज वारदात हुई।
पुलिस ने घर-घर तलाश की, जंगल में झाड़ियां खंगाली और जब रात की परछाइयों से लौटे तो उनके पास था एक तोनो, तीन कुल्हाड़ियां और चार मोबाइल। बुधनी अब नहीं रही, लेकिन सवाल जिंदा हैं। क्या गांव का हर बुजुर्ग, हर एकाकी औरत, हर अलग सोच रखने वाला इंसान “डायन” कहलायेगा? क्या अंधविश्वास के नाम पर चलने वाली कुल्हाड़ियों को कभी इंसाफ की रोशनी छू पायेगी?












