Assam : असमिया सिनेमा के सुपरस्टार, सिंगर और एक्टर जुबिन गर्ग भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आज उनकी आखिरी फिल्म “रोई-रोई बिनाले” ने हर सिनेमाघर को एक श्रद्धांजलि स्थल में बदल दिया। 31 अक्टूबर की सुबह असम में कुछ अलग थी, तेज बारिश, ठंडी हवा, और फिर भी थिएटरों के बाहर हजारों लोग, हाथों में फूल, आंखों में नमी, और दिल में बस एक नाम, जुबिन…हर शो हाउसफुल, हर सीट पर कोई न कोई जुबिन की याद में रोया, मुस्कुराया, और फिर चुप हो गया। यह नजारा किसी फिल्म रिलीज का नहीं, बल्कि एक कलाकार के जन-श्रद्धांजलि समारोह का था।
संगीत ने अमर कर दिया
बीते 19 सितंबर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान जुबिन गर्ग का निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार पर उमड़ी भीड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी जनसभा बनी थी। आज, उनकी आखिरी फिल्म “रोई-रोई बिनाले” लोगों के दिलों में उसी समंदर की तरह उमड़ रही है, जहां उनकी आखिरी सांसें बसी थीं, पर इस बार, ये लहरें संगीत की हैं, अश्रु की नहीं। फिल्म को लेकर ऐसा उत्साह कि पूरा राज्य एक सिनेमाघर बन गया है। हर शहर, हर कस्बे में सिर्फ यही फिल्म दिखाई जा रही है। मांग इतनी जबरदस्त कि आठ नये स्क्रीन खोले गये हैं, जहां शो सुबह 5 बजे से आधी रात तक चलेंगे। निर्देशक राजेश भुयान ने कहा कि यह सिर्फ जुबिन की फिल्म नहीं, यह लोगों की आत्मा है, यह इतिहास है। असम सरकार ने घोषणा की है कि फिल्म की कमाई से मिलने वाला GST कलेक्शन “कलागुरु आर्टिस्ट्स फाउंडेशन” को दिया जायेगा, जिसकी स्थापना स्वयं जुबिन गर्ग ने की थी। हर गलियों में “रोई-रोई बिनाले” की धुन है, हर रेडियो स्टेशन पर जुबिन की आवाज।










