Patna : बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में CM सम्राट चौधरी और उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर समेत कई आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में विश्वविद्यालयों की व्यवस्था सुधारने, शोध को बढ़ावा देने, शिक्षकों के स्थानांतरण, डिजिटल सिस्टम और नये विश्वविद्यालय कानून समेत कई अहम फैसलों पर सहमति बनी।
विश्वविद्यालयों के लिये बनेगा नया कानून
बैठक में तय किया गया कि बिहार के विश्वविद्यालयों के लिये नया अधिनियम तैयार किया जायेगा। इसके लिये देश के 15 राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उनका मॉडल अपनाया जायेगा। उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाना है। बैठक में शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। अब सामान्य तबादले केवल जून महीने में ही होंगे। यदि किसी अन्य समय स्थानांतरण की जरूरत पड़ेगी, तो वह केवल विशेष परिस्थितियों में और कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति से ही संभव होगा। साथ ही शिक्षकों की पदोन्नति के लिये भी समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी। शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को अनिवार्य बनाया जायेगा।पटना और मुजफ्फरपुर स्थित मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों को और अधिक सक्रिय बनाने का भी निर्णय लिया गया।
31 दिसंबर तक पूरी तरह डिजिटल होंगे विश्वविद्यालय
राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि 31 दिसंबर 2026 तक ‘समर्थ पोर्टल’ के सभी 26 मॉड्यूल पूरी तरह लागू किये जायें। इसके तहत लेखा एवं वित्त, कर्मचारी सेवा, अकादमिक प्रबंधन सहित सभी प्रक्रियायें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। बैठक में सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक लंबित डिग्रियों का वितरण पूरा करने का निर्देश दिया गया। वहीं स्नातकोत्तर के 43 विषयों के नये पाठ्यक्रम को जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
211 नये शिक्षकों की होगी नियुक्ति
बैठक में बताया गया कि नवसृजित 211 राजकीय डिग्री कॉलेजों के लिये संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की केंद्रीयकृत नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि योग्य और सक्षम शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो सके। वहीं, उच्च शिक्षा में रिसर्च को मजबूत बनाने के लिये तीन नई योजनाओं पर सहमति बनी। इसमें कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना, मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में शोध संस्कृति को नई गति मिलेगी। वहीं, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिये एक आधुनिक कुलाधिपति पुस्तकालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले शोध संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे।
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