Kohramlive : बिना फोन बजे भी कानों में रिंगटोन सुनाई देते रहने और बार-बार मोबाइल में झांकना बहुत अच्छा संकेत नहीं है। मनोचिकित्सकों के पास ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई युवा इस बीमारी के मकड़जाल में जकड़ चुके हैं। ऐसे मरीजों को लगता है कि अक्सर उनका फोन बज रहा या बाइब्रेट कर रहा है, हालांकि जब वो फोन चेक करते हैं तो पता चलता है कि असल में न तो कोई नोटिफिकेशन है और न ही कोई कॉल। मोबाइल फोन से संबंधित कई तरह के विकारों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। बिना फोन बजे घंटी सुनाई देते रहना या बार-बार वाइब्रेशन जैसा अनुभव होते रहने को मनोचिकित्सा की भाषा में फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम (PVS) की समस्या के रूप में जाना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ट वेन स्थित इंडियाना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मिशेल ड्रोइन ने इस मानसिक स्वास्थ्य समस्या को समझने के लिये अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार जो लोग टेक्स्ट मैसेजिंग (वाट्सऐप, इंस्टा या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म) पर अधिक झांकते थे, वे ज्यादा परेशान देखे गये। ऐसे लोग अक्सर फोन चेक करते पाये गये। मीडिया समूह के बड़े घराने ”अमर उजाला” में छपी खबर के अनुसार, मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत बताते हैं, मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम एक उभरता हुआ विकार है। लोगों को लगता है कि उनका सेल फोन वाइब्रेट या रिंग कर रहा है, लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है। ये असल में मनोवैज्ञानिक या तंत्रिका संबंधी परिवर्तनों से संबंधित स्थिति है। PVS की समस्या चिंता, अवसाद और भावात्मक विकारों को भी जन्म दे सकती है। अगर फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम का ठीक से इलाज न किया जाये तो लोगों में बर्नआउट सिंड्रोम हो सकता है। यह परेशानी उन लोगों में अधिक देखी जाती रही है जो फोन पर बहुत समय तक चिपके रहते हैं। वहीं, ‘अटैचमेंट एंग्जाइटी’ जो कि एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें पारस्परिक संबंधों में भय, चिंता या असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है, इसके शिकार लोगों में भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम की दिक्कत हो सकती है।
इस विकार से कैसे बचें?
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम की समस्या किसी को भी हो सकती है, इससे बचने के लिए जरूरी है कि फोन पर कम से कम वक्त गुजारना। डिजिटल डिवाइस पर कम समय बिताने की आदत बनाना भी बेहद जरूरी है। फोन के नोटिफिकेशन से ध्यान हटाने के लिए वास्तविक जीवन और बातचीत करने पर अधिक जोर दें। खेल-कूद, व्यायाम की आदत के साथ नेगेटिव थॉट से दूर हो जाना इन विकारों से बचने के बेहतर उपाय हैं।
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