UP : बागपत में नशे में धुत दो नौजवानों आर्यन और आदिल को न जाने कैसी सनक सवार हुई कि रास्ते में जो भी मिला, उसे गोली मारते चले गये। सनकी आर्यन और आदिल का इरादा तो सिर्फ अपने गांव के शेखर को मारने का था, लेकिन ढाई घंटे में चार वारदातें इस कदर घट गईं कि पूरा इलाका खौफ में डूब गया। पहली वारदात हुई शनिवार की रात साढ़े नौ बजे के करीब, बुढेड़ा गांव के अधिवक्ता रविंद्र और उनके चचेरे भाई प्रवेश बाइक से लौट रहे थे। रास्ते में मीतली-बसौद मार्ग पर मंदिर के पास आर्यन और आदिल नशे में धुत लड़खड़ाते हुये बाइक चला रहे थे। बाइक टकराने से बची तो प्रवेश ने बस इतना कहा कि “बाइक ठीक से चला ले!” आर्यन ने चलती बाइक से प्रवेश की कमर में गोली मार दी। प्रवेश अब मेरठ के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। दूसरी वारदात रात करीब 11 बजे हुई। अग्रवाल मंडी टटीरी की गलियों में अंडे की दुकान पर प्रशांत, जो सहारनपुर से रिश्तेदारी में आया था, बैठा था। वहीं पहुंच गये आर्यन और आदिल, नशे में डूबे, आवाजें ऊंची। बातों-बातों में आर्यन ने गाली दी और प्रशांत ने उसे एक थप्पड़ जड़ दिया। अगले ही पल खाई गोली से प्रशांत लहूलुहान हो गया। तीसरी वारदात में अब बारी आई उस शेखर की, जिसकी हत्या के लिये दोनों निकले थे। निवाड़ा-नौरोजपुर गुर्जर मार्ग पर रात के सन्नाटे में बाइक रोकी गई। हेलमेट उतरवाया गया, पहचान हुई और सीने पर गोली दाग दी। आर्यन का यह शेखर कोई पराया नहीं था, उसका चचेरा भाई था, पड़ोसी था, साथ खेला था, पर तीन महीने पहले एक बरात में DJ पर हुये झगड़े ने इस रिश्ते को खून में डुबो दिया। शेखर की मौत के साथ गांव में मातम और खौफ एक साथ फैल गया। चौथी वारदात रात के आखिरी पहर में हुई। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, गुफा वाले मंदिर के पास एक कार खड़ी थी, उसमें दिल्ली की विप्रो कंपनी के अधिकारी इंजीनियर अनुज नैन बैठे थे, आर्यन और आदिल पहुंचे, कुछ पूछताछ, कुछ कहासुनी और फिर गोली। अनुज नैन वहीं ढेर हो गये। उनकी कार लेकर दोनों हरिद्वार निकलने को हुये, लेकिन रास्ते में ही योजना बदल दी। 22 लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम करने वाले अनुज के दो छोटे बच्चे हैं। पत्नी की आंखें सूनी हैं, पिता का गला रुंधा है। गांव कह रहा है “कभी-कभी शराब सिर्फ नशा नहीं देती, घर-घर में मातम भी छोड़ जाती है…”






