Kohramlive : देहरादून की शांत घाटी, जिसे लोग देवभूमि का आंगन कहते हैं, मंगलवार की रात मौत की बारिश में डूब गई। सहस्रधारा में अचानक बादल फटा और दून घाटी की हरी-भरी वादियां चीखों और सिसकियों से भर गईं। मालदेवता से ऊपर बसे छोटे से गांव फुलेट में एक मकान देखते-देखते ढह गया। आठ लोग उसमें दब गये। गांव वालों की आंखों के सामने जिंदगी मलबे में समा गई। शाम तक दो शव बाहर निकाले गये, बाकी के लिये पुलिस और बचाव दल पहाड़ की चढ़ाई और तेज बहाव से जूझते रहे।
नदियों का कहर, मजदूर बह गये
आसन नदी, जो आम दिनों में गांवों को सींचने वाली शांत धारा थी, मौत का जाल बन गई। खनन कार्य में लगे 16 मजदूर ट्रैक्टर समेत बह गये। उनमें से आठ की लाशें बरामद हो गईं, छह अब भी लापता हैं। दोनों घायल मजदूरों की कराह सुनकर घाटी का दिल दहल उठा।
मंदिर भी आये आपदा की चपेट में
देहरादून की आस्था भी इस बारिश में बह गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर का गर्भगृह पानी में डूब गया, शिवलिंग जलराशि में समा गया। कुछ साल पहले स्थापित की गई विशाल पीतल की प्रतिमा बहकर न जाने कहां चली गई। जामुनवाला का एकादश मुखी हनुमान मंदिर आधा बह गया। मंदिर की दीवारों से टकराती धारा मानो भगवान से भी उनका धैर्य छीन ले गई।
पुल ढहे, शहर ठप
प्रेमनगर नंदा चौकी के पास दशकों पुराना पुल टूट गया। डालनवाला के मोहिनी रोड का पुल रिस्पना नदी की उफान में बह गया। मालदेवता के पास टिहरी जाने वाले पुल की सड़क ही पानी में समा गई। शहर की सांसें थम गईं, रास्ते लहूलुहान हो गये। NDRF और DSRF के जवान मौत और जिंदगी के बीच खड़े रहे। 70 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। आसन नदी में एक युवक बिजली के खंभे पर चढ़कर घंटों बचाव का इंतजार करता रहा। आखिरकार उसे जवानों ने उतारा, लेकिन उस रात उसकी आंखों में डर स्थायी तस्वीर बनकर रह गया।












