Ranchi : उमेश यादव उर्फ विमल उर्फ राधेश्याम यादव यानी आंतक की गाथा लिखने का दूसरा नाम। इसका नाम सुन ही लोग कांप उठते थे। सितमगरों में भी इसके नाम का भय था। गांव का सीधा-साधा छउआ देखते ही देखते 25 लाख का इनामी माओवादी बन गया। माओवादी विमल यादव का संगठन में बड़ा कद था। उसे स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य का तमगा मिला था। संगठन में सबसे पहले विमल को कुरियर पहुंचाने का काम दिया गया। विमल साल 2005 में सब जोनल कमांडर बना। 2009 में जोनल कमांडर, 2011 में रीजनल सदस्य और 2012 में एसएसी सदस्य बना। इसके बाद साल 2018 के दिसम्बर में प्लाटून और फिर 2019 में सुधाकरण की मौत के बाद उसे प्लाटून का चार्ज दिया गया था।
मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिला के सलेमपुर थाना के करौना के रहने वाले खूंखार विमल ने शुक्रवार को सरेंडर कर दिया। उसने आईजी ऑपरेशन अमोल वेणुकांत होमकर, आईजी पंकज कंबोज, डीआईजी एसटीएफ अनूप बिरथरे और रांची एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा के सामने हथियार डाला। विमल गुजरे कई सालों से बूढ़ा पहाड़ के इलाके में सक्रिय था। बूढ़ा पहाड़ माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। पुलिस को दिये अफने बयान में विमल ने कई राज उगले हैं। उसने बताया कि संगठन अपने लाइन, नीति और सिद्धांत से भटक चुका है।काफी भेदभाव भी होने लगा है। उसी से नाराज होकर और सरकार की सरेंडर पॉलिसी ‘नई दिशा- एक नई पहल’ से प्रभावित होकर उसने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने बताया कि बाहरी लोगों को संगठन में ज्यादा तरजीह मिल रही थी। उग्रवादी विमल के खिलाफ कई संगीन मामले पुलिस फाइल में दर्ज हैं।
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