Ranchi : जब पहलगाम में आतंक की आग लगी, तब इटकी ने अपने हाथों में रौशनी थामी। नफरत की रात में इंसानियत का उजाला लेकर निकल पड़े इटकी के मुसलमान – नारे लगाते नहीं, इंसानियत निभाते हुये।” राजधानी रांची से सटे इटकी में कैंडल मार्च निकाला गया। “यह कैंडल मार्च नहीं था… यह एक आवाज थी उस भारत की, जो मजहब से नहीं, मजबूती से बोलता है। ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’, ‘आतंकवाद मुर्दाबाद’, ‘आतंकियों को फांसी दो’ – ये सिर्फ नारे नहीं थे, ये उस दर्द की चीत्कार थी, जो पूरे देश में गूंज रही थी।” “मुस्लिम अधिकार मंच की मांग – आतंकियों को सार्वजनिक फांसी। शहीदों के परिवारों को 5 करोड़ मुआवजा। सुनें क्या बोले मुर्तजा आलम और अफसर इमाम…
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