Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के नामधारी कॉलेज के पास अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी। पीयूष गुप्ता के घर के बाहर गोलियों की बौछार ने पूरे इलाके को दहशत से भर दिया। रवि तिवारी गैंग गढ़वा में रंगदारी और खौफ का कारोबार चलाता है। पीयूष गुप्ता ने पुलिस को बताया कि फायरिंग से पहले उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया था। फोन पर सिर्फ एक बात हुई “10 लाख रुपये दो, वरना अंजाम बुरा होगा…” कॉल करने वाला कोई और नहीं, बल्कि हंसकेर गांव का रहने वाला अनुज कुमार तिवारी था। वही अनुज, जो उस शाम कस्तूरबा विद्यालय के मैदान में गैंग के बाकी सदस्यों के साथ बैठा था। गढ़वा पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुये तुरंत एक स्पेशल टीम बनाई। SDPO के नेतृत्व में गठित टीम ने अनुज तिवारी को उसके घर से दबोच लिया। उसके घर से पुलिस ने एक देसी कट्टा, (वही हथियार जिसे रवि तिवारी ने फायरिंग के बाद उसे सौंपा था) बरामद की है।
गैंग का राज खुला
पूछताछ में अनुज तिवारी ने सब कुछ उगल दिया। उसने बताया कि रवि तिवारी अपनी महिंद्रा कार से गैंग के साथ मैदान में आया था। कार में पहले से रोहित तिवारी, गौरव तिवारी और रूपेश उर्फ बिट्टू तिवारी बैठे थे। उनके पास दो दोनाली बंदूक और एक कट्टा था। रवि ने अनुज को आदेश दिया कि वह पीयूष गुप्ता को फोन करके 10 लाख रुपये की मांग करे। इसके बाद सबने मिलकर पीयूष गुप्ता के घर पर फायरिंग की, ताकि इलाके में दहशत फैले। फिलहाल रवि तिवारी और उसके बाकी गुर्गे फरार हैं, लेकिन पुलिस उनकी तलाश में पूरे इलाके की खाक छान रही है।






