- झारखंड विधानसभा परिसर में 72वें वन महोत्सव का आयोजन
- मुख्यमंत्री और विस अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने की शिरकत, दोनों ने परिसर में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
RANCHI : भौतिकवादी युग में विकास की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते न जाने कितनी बार प्रकृति का दोहन किया जा रहा है। पर्यावरण से छेड़छाड़ का ही नतीजा है कि वर्षों-महीनों जंगलों में आग लगते देखा जाता है। कहीं नदियां सूख रही हैं तो कहीं बाढ़ का प्रकोप, तूफान, बेमौसम बारिश, देश और दुनिया में अनेकों प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं देखी और सुनी जा रही हैं। इन सभी आपदाओं का मानव जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ईश्वर ने धरती पर मौजूद जल, जंगल, जमीन मानव सभ्यता एवं जीवन के लिए एक ऐसी प्राकृतिक व्यवस्था के रूप में हमें दिया है, जिसके माध्यम से हम सभी लोग अपना जीवन यापन करते हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ अथवा इनका दोहन करना जीवन के लिए खतरे की घंटी है। पर्यावरण और मानव जीवन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। सरकार के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भी प्रकृति संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। यह बातें CM ने सोमवार को झारखंड विधान सभा परिसर स्थित सभागार में आयोजित 72वें वन महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
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एक-दूसरे को उपहार स्वरूप बुके की जगह दें पौधा
सीएम ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण को लेकर देश एवं दुनिया में कई गोष्ठियां, सेमिनार हो रहे हैं। हमारे झारखंड प्रदेश को प्रकृति ने बहुमूल्य उपहार के रूप में जंगल-झाड़, नदी-झरने, प्राकृतिक सौंदर्य से संवारने का काम किया है। वन-जंगल से आच्छादित यह प्रदेश सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं जाना जाता है, बल्कि जमीन के ऊपर और जमीन के भीतर खनिज संपदा का भंडार भी हमें प्रकृति ने दिया है। वृक्षों को कटने से बचाना वर्तमान समय में महत्वपूर्ण है। किसी भी कार्यक्रमों में लोग एक दूसरे को उपहार स्वरूप बुके देने का कार्य करते हैं, परंतु मेरा मानना है कि बुके की जगह क्यों न हम उपहार स्वरूप एक दूसरे को पौधा देने का काम करें एवं उस पौधे को संरक्षित करने का संकल्प लें।
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फलदार वृक्षों का विकसित किया जाए बगीचा
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड विधान सभा परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का एक नया मॉडल बनाया जाए। यह विधान सभा परिसर 50-60 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इस भूमि के अंतर्गत एक फलदार वृक्ष का चुनाव कर लिया जाए और इस परिसर को बगीचा के रूप में विकसित किया जाए तो यह एक बहुत ही सकारात्मक और अच्छी पहल हो सकती है। रिसोर्सेज जनरेट कर विधान सभा परिसर को एक बेहतरीन बगीचा के रूप में विकसित कर आय का साधन बनाया जा सकता है।
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पर्यावरण संतुलन समय की मांग : विस अध्यक्ष
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संकट मानव सभ्यता के बीच उभरकर आया है। निश्चित रूप से इस संकट से उबरने के लिए हम सभी को आगे आने की आवश्यकता है। पर्यावरण संतुलन समय की मांग है। वन-जंगल, पेड़-पौधा का ग्रामीण अर्थ नीति में महत्वपूर्ण स्थान है। पेड़ की खेती एक ऐसी खेती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है। हाल के दिनों में पूरा विश्व ऑक्सीजन संकट से गुजर रहा था। वृक्षों की कटाई का मानव जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सुझावों के अनुरूप निश्चित रूप से झारखंड विधान सभा परिसर में फलदार वृक्ष लगाने का कार्य किया जाएगा।
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राज्य में बिरसा मुंडा हरित ग्राम योजना का रिस्पांस सकारात्मक
संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पिछले वर्ष राज्य में बिरसा मुंडा हरित ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। इसका रिस्पांस अभी तक बहुत ही सकारात्मक रहा है। बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण कार्य करने की जरूरत है।
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इनकी भी रही मौजूदगी
मौके पर मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, बादल पत्रलेख, विधायक लंबोदर महतो, दीपिका पांडे सिंह, अनूप सिंह, ममता देवी, बैजनाथ राम, समरी लाल, समीर मोहंती, अमित मंडल, विनोद सिंह सहित अन्य विधायकों ने भी पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। अपर मुख्य सचिव एल खियांगते, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एनके सिंह सहित अन्य वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे।














