Garhwa(Nityanand Dubey) : कभी बंकिम चंद्र चटर्जी की लेखनी से निकला एक गीत ‘वंदे मातरम्’, जिसने भारत की आत्मा को शब्दों में बांधा, आज अपने 150 वर्ष पूरे कर चुका है। इस ऐतिहासिक अवसर पर, गढ़वा की धरती देशभक्ति के उस स्वर से गूंज उठी जो हर भारतीय के दिल की धड़कन है। आज जिले के सभी थाना, ओपी और पुलिस प्रतिष्ठानों में थानेदार से लेकर आरक्षी तक, हर वर्दी एक स्वर में “वंदे मातरम्” गा रही थी। गढ़वा पुलिस लाइन में हुये मुख्य आयोजन में SP ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, यह भारत की आत्मा की पुकार है।” उनके शब्दों के साथ ही हवा में घुला वह संगीत, जिसने आजादी के दीवानों को कभी जंजीरों से तोड़ा था।
वर्दी के भीतर भी बसता है एक देशभक्त हृदय
कार्यक्रम में SP अमन कुमार ने कहा कि “जैसे यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा बना, वैसे ही आज हमारे लिये यह सेवा, समर्पण और बलिदान का मन्त्र है।” गढ़वा पुलिस के हर जवान की आंखों में गर्व की चमक थी। पूरा वातावरण देशभक्ति की सुगंध से भर गया।






