Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के गोविंद उच्च विद्यालय मैदान में आयोजित कवि सम्मेलन में ऐसी महफिल बनी कि रात कब ढल गई, किसी को पता ही नहीं चला। सृजन साहित्यिक मंच के कवि सम्मेलन ने पूरे शहर को कविता के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम का आगाज मिर्जापुर से आईं कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने मां सरस्वती की वंदना से किया। फिर जैसे ही उन्होंने पढ़ा, “हुये प्यार के सिलसिले देख ले…” पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। उनकी भोजपुरी पंक्तियां “आग लागी त कुछ पल लहकबे करी…” गढ़वा के दिल में उतर गईं। लोग बोले, “वाह! ई त हमार माटी के महक बा।” सीतामढ़ी से आये कवि प्रशांत बजरंगी ने जब देशभक्ति की कविता सुनाई, तो माहौल बदल गया। हर श्रोता खड़ा हो तालियों से कवि का सम्मान किया। तिरंगे वाली पंक्तियों ने पंडाल में जोश भर दिया। बनारस के गीतकार मनोज मधुर ने “भउजी ओरा जाइल बाटे फगुनवा” सुनाकर ऐसा रंग जमाया कि लोग झूम उठे। भभुआ के शंकर कैमूरी ने मंच संचालन करते-करते जब हास्य रचनाएं सुनाईं, तो लोग पेट पकड़कर हंस पड़े। मऊ के पंकज प्रखर, स्थानीय कवि संजय चौबे और दयाशंकर तिवारी ने होली गीतों से महफिल में रंगों की बौछार कर दी।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि गढ़वा में जो साहित्यिक माहौल बना है, वह समाज के लिये जरूरी है। SDO संजय कुमार ने भी मंच के प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई सोच देते हैं। कार्यक्रम से पहले मंच के सचिव सतीश कुमार मिश्र ने ‘शहरनामा’ के जरिये शहर की समस्याओं को व्यंग्य में ढालकर पेश किया। हंसी भी आई और सोचने पर भी मजबूर कर दिया। मीडिया प्रभारी दयाशंकर गुप्त को विशेष सम्मान दिया गया। इस अवसर पर गढ़वा के विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी, पूर्व सांसद घुरन राम, नवनिर्वाचित अध्यक्ष दौलत सोनी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की सफलता में विनोद पाठक, राकेश त्रिपाठी, रासबिहारी तिवारी, राजकुमार मधेशिया और प्रमोद कुमार की भूमिका सराहनीय रही।










