Ranchi(Kuldeep/Amitabh) : सपने जब मजबूत हों तो रास्ते खुद बनते हैं, लेकिन जब हालात कमजोर हों, तब संघर्ष कहानी बन जाता है। रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के रुक्का गांव की मुंडा टोली की 14 साल की बेटी अनुष्का आज झारखंड की ‘वीर बाला’ है, मगर अपनी किस्मत की मारी है। सोमवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित झारखंड की होनहार फुटबॉलर अनुष्का का उनके घर पहुंचकर समाजिक कार्यकर्ताओं ने शॉल और फूलों के गुलदस्ते के साथ सम्मान किया। तालियों की गूंज तो थी, लेकिन आंखों में सवाल भी, इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी हालात क्यों नहीं बदले। अनुष्का ने महज 12 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया। संसाधन न मैदान, न पैसे, फिर भी जज्बा ऐसा कि SAFF अंडर-16 महिला चैंपियनशिप 2024 में टॉप गोल स्कोरर बनीं। झारखंड टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। वीर बाल दिवस पर नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनुष्का से मुलाकात कर हौसला बढ़ाया। अनुष्का की कहानी जितनी चमकदार है, उसकी जिंदगी उतनी ही कठोर है। दो मिट्टी के छोटे कमरे, उसी में पूरा परिवार रहता है। पिता विकलांग हैं, काम करने में असमर्थ है। बुज़ुर्ग मां को वृद्धा पेंशन तक नहीं मिलती। सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ एक अंबेडकर आवास मिला। रुक्का गांव में एक भी खेल मैदान नहीं। इसी मजबूरी में अनुष्का हजारीबाग में अपनी फुआ और कोच के पास रहती है। वहीं पढ़ाई भी करती है और वहीं फुटबॉल की प्रैक्टिस करती है। सुनें क्या बोली अनुष्का और परिवार के लोग….









