Kohramlive : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया का मंगलवार सुबह 6 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। वे 80 साल की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे युग का अंत हो गया। 1945 में तत्कालीन बंगाल के दिनाजपुर में जन्मीं खालिदा का असली नाम खालिदा खानम ‘पुतुल’ था। पिता इस्कन्दर अली मजूमदार चाय के व्यापारी थे। 1960 में उनका निकाह पाकिस्तानी सेना के अधिकारी जियाउर रहमान से हुआ और तभी वे बनीं खालिदा जिया। लंबे समय तक उन्होंने खुद को घर-परिवार तक सीमित रखा।
पति की हत्या से शुरू हुई राजनीति
1971 के मुक्ति संग्राम में जियाउर रहमान की भूमिका अहम रही। 1977 में वे राष्ट्रपति बने और खालिदा देश की प्रथम महिला बनीं, लेकिन राजनीति से दूरी बनाये रखी। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया ने बीएनपी को संभाला और यहीं से उनका सियासी सफर शुरू हुआ। सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलनों में वे उभरीं और धीरे-धीरे राष्ट्रीय नेता बन गईं। खालिदा जिया दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। वे किसी मुस्लिम देश की दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं, उनसे पहले पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो। 2008 के बाद बीएनपी सत्ता से बाहर रही। 2018 में भ्रष्टाचार के मामलों में खालिदा जिया को दोषी ठहराया गया और 17 साल की सजा सुनाई गई। खराब स्वास्थ्य के चलते 2020 में सजा निलंबित हुई। अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उनकी सजा माफ कर दी गई। इलाज के लिए वे इस साल लंदन गईं, मई में लौटीं, लेकिन नवंबर में फिर हालत बिगड़ी। मंगलवार को उनका निधन हो गया।




