BIHAR: बिहार सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री और JDU के वर्तमान विधायक मेवालाल चौधरी का राजकीय सम्मान के साथ पटना के गल्बी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें 21 बंदूकों की सलामी दी गई। कोरोना से उनकी मौत हो गई थी।
Read More :पति ही निकला पत्नी और बच्चों का हत्यारा, इस वजह से तीनों को काट डाला था
अस्पताल में समय से नहीं मिल पाया था आईसीयू
अस्पताल में समय से ICU नहीं मिल पाया। IGIMS से लेकर पारस तक की कहानी यही बताती है। RTP-CR जांच 12 को की गई, 13 को सैंपल रिसीव और 16 को रिपोर्ट आई थी। इलाज में कितनी भी देरी के कारण उनकी मौत हो गई।
Read More : #Dhanbad में #Corona ने ली एक ही परिवार के 5 लोगों की जान, पिछले साल भी हुआ था ऐसा ही हादसा
खुद पर लगे आरोपों का खंडन किया था
मेवालाल मुंगेर जिले के तारापुर के रहने वाले थे। पढ़े-लिखे नेता थे। सबौर कृषि विवि के कुलपति रहे और तारापुर से चुनाव जीतने के बाद उन्हें सरकार ने शिक्षा मंत्री बनाया था। कुलपति रहते हुए की गई बहाली में गड़बड़ी के आरोप में विपक्ष के दबाव पर उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। 2012 में सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 161 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा मामले का आरोप उन पर था। मंत्री पद से हटाए जाने के बाद आरोपों पर मेवालाल ने सफाई दी थी कि ‘ मुझ पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
Read More :MLC संतोष सिंह के पुत्र और मुजफ्फरपुर जंक्शन के पूर्व DCI की कोरोना से मौत
दो में से एक पुत्र ही पहुंच पाए
बुधवार को उनके बड़े पुत्र रवि प्रकाश अमेरिका से पहुंचे और उन्होंने मुखाग्नि दी। उनके दूसरे बेटे मुकुल भास्कर आस्ट्रेलिया से पटना नहीं आ सके, क्योंकि अभी आस्ट्रेलिया और भारत के बीच हवाई सेवा बंद है। बड़े पुत्र रवि प्रकाश भी पिता का दाह संस्कार करने अकेले पटना पहुंचे। दाह संस्कार के बाद वे अपने गृह क्षेत्र तारापुर चले गए।












