UP : मथुरा के खप्परपुर गांव की सुबह में आज सूरज तो निकला, लेकिन एक घर के लिए जिंदगी हमेशा के लिए डूब गई। जिस आंगन में कल तक बच्चों की हंसी बिखरी रहती थी, वहां मंगलवार को सिर्फ सन्नाटा पसरा था, भारी, डरावना और सवालों से भरा हुआ। किसान मनीष, उनकी पत्नी सीमा और उनके तीन नन्हे बच्चे—हनी, प्रियांशी और मासूम पंकज, सब एक ही छत के नीचे खामोश पड़े थे। जहर ने न सिर्फ उनकी सांसें छीनीं, बल्कि एक पूरे परिवार की उम्मीदें, सपने और भविष्य भी छीन लिया। रसोई की दीवार पर लिखे एक वाक्य ने मानो दिल पत्थरा दिया “हम स्वयं आत्महत्या कर रहे हैं।”
यह सिर्फ स्याही नहीं थी, यह उस बेबसी की आखिरी चीख थी जिसे कोई सुन नहीं पाया। पुलिस कारणों की तलाश में है, लेकिन सवाल यही है कि कौन-सा ऐसा दर्द था, जिसने मां-बाप को अपने जिगर के टुकड़ों को भी इस अंधेरे रास्ते पर ले जाने पर मजबूर कर दिया। कुछ दिन पहले पिता का देहांत हुआ था, घर के पास अपने लोग भी थे, फिर भी यह टूटन भीतर ही भीतर पलती रही। लोगों की खबर पर पुलिस मौके पर पहुंची है और इंवेस्टिगेशन जारी है।
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