लोहरदगा : Chariya – चरिया हत्याकांड की जांच में लोहरदगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जुरिया गांव में बीते आठ नवंबर को हुए 40 वर्षीया चरिया उरांव हत्या के मामले में उसके भतीजे समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
लोहरदगा पुलिस कप्तान प्रियंका मीणा ने बताया कि जमीन विवाद के कारण बिरसा उरांव के भतीजे विजेंद्र उरांव अपने चाचा की जमीन से हड़पने की नीयत से बिरसा और उसकी पत्नी चरिया उरांव की हत्या की योजना बनायी थी, ताकि वह जमीन को अपने मन मुताबिक ढंग से बेच सके।
रांची से हायर किया था शूटर
इसके लिए योजना बनाकर हत्या को अंजाम देने की रणनीति बनाई गई। सबसे पहले विजेंद्र से जमीन दलाल दीपक कुजूर और विकास उरांव दोनों भाई ने जुरिया बड़का टोली निवासी बिरसा उरांव से मेलजोल बढ़ाया। जब विश्वास प्रगाढ़ होने लगा, तो तीनों ने मिलकर शूटर रांची के नरकोपी थाना क्षेत्र के सेरोगाडो निवासी संजय उरांव और लोहरदगा सेन्हा थाना क्षेत्र के जोगना स्थित नवोदय विद्यालय मोड़ के शातिर शूटर राजकुमार ठाकुर को हायर किया।
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Chariyaखलिहान में थे हत्या के समय
आठ नवंबर को जब बिरसा और चरिया धान खलिहान की निगरानी कर रहे थे। उसी वक्त सभी पांच लोग बाइक से वहां पहुंचे। बिरसा और चरिया को लक्ष्य कर नाइन एमएम पिस्टल से गोली चलाई। इससे चरिया के पेट में गोली लगी और मौके पर उसकी मौत हो गई। इससे बिरसा घबरा गया। गांव के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। इस हत्याकांड का कोई सुराग पुलिस को हाथ नहीं लगा था।
अधिकारियों की बनाई गई थी टीम
पुलिस कप्तान प्रियंका मीणा ने एसडीपीओ जितेंद्र कुमार सिंह की अगुवाई में सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों की एक टीम बनाई। टीम ने करीब एक सप्ताह के अंदर पूरे मामले का खुलासा करते हुए, इसका पटाक्षेप किया।
पुलिस ने दीपक कुजूर, विकास और विजेंद्र बाखला को जुरिया से, संजय उरांव नरकोपी से और राजकुमार ठाकुर को जोगना गिरफ्तार किया। पूछताछ में सभी ने अपराध को स्वीकार करते हुए कहा कि घटना को हम ही लोगों ने ही अंजाम दिया था। अपराधियों के पास से नाइम एमएम का देसी पिस्तौल जिसे हत्या में उपयोग किया गया था। तीन कारतूस, चार मोबाइल, बाइक भी जब्त किया है।
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