20 साल का Jharkhand , पर ‘विकास’ अबतक पालने में

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रांची, सत्य शरण मिश्र : 15 नवंबर। यह तारीख Jharkhand के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन झारखंड वासियों के भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था और 20 साल पहले इसी दिन झारखंड को अपनी अलग पहचान मिली थी। 20 साल के युवा झारखंड ने अपनी इतनी छोटी सी उम्र में कई उतार-चढ़ाव देखे। राजनीतिक अस्थिरता देखी। सरकारों को गिरते-बनते देखा।

सांसदों और विधायकों को बिकते देखा। नक्सलवाद और उग्रवाद के नाम पर कत्लेआम देखा। मासूम और बेगुनाहों को मॉब लिंचिंग का शिकार होते देखा। जिस उद्देश्य से झारखंड का जन्म हुआ था सिर्फ उसे छोड़कर इसने सबकुछ देखा।

Jharkhand में पाया कम, खोया ज्यादा है

लंबी लड़ाई के बाद मिले अलग राज्य को लेकर एक सवाल हमेशा प्रासंगिक रहा है कि झारखंड ने क्या खोया और क्या पाया। 20 सालों के इतिहास को देख लें तो Jharkhand ने पाया कम और खोया बहुत ज्यादा है। हमें अलग झारखंड की जरूरत क्यों थी? क्योंकि यहां के लोगों को विकास चाहिए था। रोजगार की जरूरत थी।

पलायन और ट्रैफिकिंग रोकनी थी। शिक्षा का स्तर सुधारना था। गरीबों और किसानों को आगे बढ़ाने था, लेकिन क्या यह सब हुआ? 20 साल में कितने लोगों को रोजगार मिला। क्या ट्रैफिकिंग और पलायन रुका। नक्सलवाद और उग्रवाद का सफाया हुआ?

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झारखंड के साथ गठित अन्य राज्य काफी आगे बढ़ गए

झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड को भी अलग राज्य का दर्जा मिला था। यह दोनों राज्य कई मामलों में झारखंड से बहुत आगे पहुंच गये, लेकिन झारखंड कछुए की गति से ही चल रहा है। राज्य में जिसकी भी सत्ता आयी सबने इसे चारागाह ही समझा। जिस जल, जंगल और जमीन से झारखंड की पहचान है, लेकिन सरकारों ने इसे बचाने के बजाए इनके लूट के लिए पूंजीपतियों को आमंत्रित कर लिया। सरकारें और विपक्ष तो बस मोमेंटम झारखंड, सीएनटी-एसपीटी, स्थानीयता, जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों से ही घिरी रही।

राजनीतिक अस्थिरता ने विकास को रोका

राज्य बनते ही भ्रष्टाचार के दीमक ने इसे खोखला करना शुरू कर दिया था। राजनीतिक दलों में झारखंड को लूटने की भूख इतनी थी कि बेमेल गठबंधन कर सरकार बना लिया। झारखंड देश का पहला राज्य बना जहां दो दलों ने 28-28 महीने तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की डील की।

चार हजार करोड़ का घोटाला करने के लिए एक निर्दलीय को मुख्यमंत्री बना दिया। हालांकि 2015 के बाद राज्य में राजनीतिक स्थिरता आई है। विकास की गति बढ़ रही है। अब देखना ये है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने कार्यकाल में झारखंड के विकास को कहां तक पहुंचाते हैं।  

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