Chouparan : हजारीबाग के चौपारण स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में उगम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित पांच दिवसीय शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम पूरा हो गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के सीखने, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाने को लेकर कई गतिविधियां आयोजित की गई। इस पहल में उगम एजुकेशन फाउंडेशन की चयनित सदस्य करिश्मा कुमारी और रूबी कुमारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छात्राओं को दी गई ये सीख
- कार्यक्रम के दौरान कक्षा सातवीं की छात्राओं के लिये इंग्लिश रेमेडियल शिक्षा से जुड़े विशेष सत्र आयोजित किये गये।
- फोनिक्स के माध्यम से अंग्रेज़ी सीखने की तकनीक
- डायग्राफ और CVC साइट वर्ड्स की जानकारी
- आसान और रोचक तरीके से अंग्रेज़ी पढ़ने और समझने का अभ्यास
- गतिविधि आधारित शिक्षण के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर
इन सत्रों से छात्राओं में सीखने के प्रति उत्साह देखने को मिला।
माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर जागरूकता
- पांच दिनों तक छात्राओं के लिये माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (MHM) पर भी विशेष सत्र आयोजित किये गये।
- माहवारी से जुड़े मिथक
- किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलाव
- स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व
- खुद के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता
- इन सत्रों के दौरान छात्राओं को खुलकर अपनी बात रखने और सही जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
बाल संसद और नेतृत्व क्षमता पर हुई चर्चा
- कार्यक्रम में छात्राओं को नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
- छात्राओं को बताया गया कि विद्यालय में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से निभाना
- सुबह की गतिविधियों का संचालन
- जिम्मेदारी के साथ कार्य करना
- नेतृत्व क्षमता को विकसित करना
लाइब्रेरी लीडर्स के लिए रचनात्मक गतिविधियां
लाइब्रेरी लीडर्स के साथ स्टोरी टेलिंग, स्टोरी राइटिंग और कहानी पढ़ने जैसे अभ्यास कराए गए।
गतिविधियों की खास बातें
- छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
- रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिला।
- कहानियों और पुस्तिकाओं का निर्माण किया गया।
- टीमवर्क और कल्पनाशक्ति को प्रोत्साहन मिला।
विद्यालय परिवार के सहयोग से कार्यक्रम सफल
- कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की वार्डेन ललिता कुमारी और पूर्व वार्डेन संघमित्रा कुमारी की भूमिका सराहनीय रही।
- छात्राओं को हर गतिविधि में भाग लेने के लिये प्रेरित किया गया।
- समय-समय पर आवश्यक सुझाव दिए गये।
- विद्यालय का सकारात्मक माहौल सीखने के लिए अनुकूल बना।
- शिक्षिकाओं और विद्यालय परिवार के सहयोग को भी कार्यक्रम की सफलता का महत्वपूर्ण कारण बताया गया।
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