मां की दुआओं और संघर्ष का असर, 31 साल बाद बाहर आया बेटा… देखें

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KohramLive : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे एजी पेरारिवलन को 31 साल बाद केस से रिहा कर दिया। राजीव गांधी की हत्या ने पूरे देश को दहला कर रख दिया था। देश को हिला देने वाले इस कांड में कुल 7 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी। यह सजा टाडा अदालत और सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाई गई थी। 18 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एल नागेश्वर राव, बीआर गवई और एएस बोपन्ना की बेंच ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए ये फैसला सुनाया। रिहाई के बाद पेरारिवलन ने रिहाई के बाद दो टुक सिर्फ इतना कहा कि ‘यह मेरी मां की दुआओं का असर है। मेरी मां के 31 सालों की संघर्ष आखिर सफल हुई। इस केस की ईमानदारी ने उसे और उसकी मां को तीन दशकों तक लड़ने की ताकत दी। ये जीत उसके संघर्ष की जीत है। मैं अभी बाहर आया हूं… अब खुली हवा में सांस लेना है।’

मर्डर के 20 दिनों बाद हुआ था गिरफ्तार

राजीव गांधी की हत्या के बीस दिनों बाद यानी 11 जून 1991 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी। पेरारिवलन पर दो तरह के इल्जाम थे। पहला, उसने 9 वोल्ट की दो बैटरियां खरीदकर हत्याकांड के मास्टरमाइंड LTTE के सिवरासन को दी थी। इस बैटरी का इस्तेमाल बम बनाने में हुआ था। दूसरा, इस खतरनाक हत्याकांड के सूत्रधार सिवरासन को गलत एड्रेस के सहारे एक मोटसाइकिल खरीदवाई थी।

28 जनवरी 1998 को टाडा कोर्ट ने पेरारिवलन समेत 26 लोगों को सजा-ए-मौत सुनाई। 11 मई 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने मुरुगन, पेरारिवलन, संथान और नलिनी सहित चार की मौत की सजा को बरकरार रखा। वहीं, तीन अन्य आरोपियों की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। वहीं 19 अन्य को रिहा कर दिया।

राष्ट्रपति ने खारिज कर दी थी दया याचिका

मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, 19 साल उम्र में सजा-ए-मौत की सजा पाने वाले पेरारिवलन की सजा उम्रकैद में बदल दी गई थी। उसकी मां लगातार इस कोशिश में जुटी रही कि किसी तरह उसके बेटे को माफ कर दिया जाये। राष्ट्रपति तक दया याचिका दी गई थी।, जिसे खारिज कर दिया गया था। बाद में तमिलनाडू सरकार की आग्रह पर फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी गई।

जेल में रहते हुए ही 12वीं की परीक्षा पास की थी, फिर उसने तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी से एक डिप्लोमा कोर्स किया था। बाद में उसने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से बीसीए किया और फिर कंप्यूटर में ही मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पेरारिवलन जेल में अपने कैदी साथियों के साथ मिलकर एक बैंड भी चलाता था।

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