कोहराम लाइव डेस्क : बेशक एक्सेस ऑफ एवरी थिंग इज बैड अर्थात किसी भी चीज की अति हानिकारक होती है। अति की वर्जना आवश्यक है। एक्सरसाइज से हमारी सेहत मजबूत होती है, पर यदि एक्सेस एक्सरसाइज हो तो शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ठीक यही बात खाने-पीने की चीजों के संबंध में भी सही है। यदि ज्यादा खा लेंगे तो हाजमा बिगड़ जाएगा। मीठे फलों और जूस में उपलब्ध फ्रक्टोज से हमें डायरेक्ट एनर्जी मिलती है, पर यदि इसे एक्सेस मात्रा में ले लें, तो हमारे इम्यून सिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ने लगेगा। इससे हमारी इम्युनिटी पावर कम होने लगेगी।
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अधिक मीठा खाने की आदत से आएं बाज
खाने-पीने की सबकी अपनी-अपनी आदत होती है। कोई अधिक मीठा खाना पसंद करता है, तो कोई सामान्य। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ चीनी ही नहीं बल्कि फ्रूट जूस, शहद, कैरमल, सूखी अंजीर, मीठी सॉफ्ट ड्रिंक्स, सेब-आम-केला जैसे फल आदि का भी बहुत अधिक सेवन करते हैं। यह आदत अच्छी नहीं है। जान लें कि ऐसे भोज्य पदार्थों में फ्रक्टोज (Fructose) की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह एक प्रकार का शुगर ही है, जो फ्रूट्स के अलावा फ्रूट जूस, कुछ सब्जियों और शहद में भी पाया जाता है। हाल के रिसर्च में यह पता चला है कि अधिक फ्रक्टोज के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इससे इम्यून सिस्टम पर खराब असर पड़ता है।
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फैटी लिवर डिजीज होने का खतरा
नेचर कम्यूनिकेशन्स नाम के जर्नल में प्रकाशित लेख के अनुसार, शुगरी ड्रिंक्स , मिठाइयों के अलावा प्रोसेस्ड फूड्स में भी फ्रक्टोज अधिक पाया जाता है। इस तरह के डाइट का बहुत अधिक सेवन करने से मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज होने का खतरा अधिक होता है। हालांकि इम्यून सिस्टम पर फ्रक्टोज का क्या प्रभाव पड़ता है इस बारे में अब तक कोई रिसर्च नहीं हुई थी।
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अंदरूनी सूजन और जलन की समस्या
नई स्टडी से पता चलता है कि फ्रक्टोज का अधिक सेवन करने से इम्यून सिस्टम में इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन और जलन) होने लगता है। इसकी वजह से सिस्टम की कोशिकाएं, ऊत्तक डैमेज हो जाते हैं जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इस स्टडी में इस बारे में भी और अधिक बताया गया है कि कैसे फ्रक्टोज का संबंध डायबिटीज और मोटापे से है।








