Kohramlive : इन दिनों सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग चीनी बैटरी मैनेजमेंट एप BAT-BMS की मदद से सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर को अचानक रोकते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सड़क सुरक्षा बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। मामला बढ़ने के बाद सरकार ने ऐसे तीन एप्स को तत्काल प्ले स्टोर से हटाने के निर्देश दिये हैं और अन्य संदिग्ध एप्स की भी जांच शुरू कर दी है।
क्या है BAT-BMS एप?
BAT-BMS (Battery Management System) एक बैट्री मॉनिटरिंग एप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Green Energy Technology ने विकसित किया है। यह एप 10 से 15 मीटर के दायरे में ब्लूटूथ बैट्री से कनेक्ट हो सकता है। बैट्री का वोल्टेज, तापमान और करंट रियल-टाइम में दिखाता है। बैट्री के प्रदर्शन को मॉनिटर और कंट्रोल करने की सुविधा देता है। असल उद्देश्य बैट्री मैनेजमेंट है, लेकिन कमजोर सुरक्षा के कारण यह विवाद में आ गया है।
कैसे सड़क पर रुक रहे हैं ई-रिक्शा?
विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या उन ई-रिक्शा और ई-स्कूटर में है जिनमें लो-कॉस्ट बैट्री सिस्टम लगे हैं। ब्लूटूथ डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है। ऑथेंटिकेशन (पासवर्ड/आईडी) कमजोर या मौजूद नहीं है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति पास खड़े होकर एप के जरिये बैट्री सिस्टम से कनेक्ट कर सकता है और डिस्चार्ज स्विच बंद कर वाहन को अचानक रोक सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इसी तरह की घटनायें देखी गई हैं, जहां चलते वाहन अचानक बंद हो जाते हैं और चालक असंतुलित हो जाता है।
सरकार की कार्रवाई
सरकार ने इस गंभीर खतरे को देखते हुये BAT-BMS, Lossigy और Epoch-li-ion एप्स को हटाने का आदेश दिया। एप स्टोर कंपनियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिये। ऐसे अन्य संभावित खतरनाक एप्स की पहचान शुरू कर दी है। IT सचिव के हवाले से मीडिया में आई खबर अनुसार, भविष्य में ऐसे एप्स को रोकने के लिये एक मजबूत सिस्टम तैयार किया जायेगा ताकि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता न हो।
विशेषज्ञों की राय: ‘कॉस्ट कटिंग की बड़ी चूक’
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बैट्री सिस्टम में सुरक्षा परत (authentication layer) की अनदेखी की गई है, जो बड़ी तकनीकी चूक है। उनका कहना है कि बैट्री किट में सुरक्षा मैकेनिज्म कमजोर रखा गया, पासवर्ड या ID आधारित सुरक्षा नहीं जोड़ी गई, यह अक्सर लागत कम करने के लिये किया जाता है। साइबर विशेषज्ञ का कहना है कि कई बैटरियों में ब्लूटूथ तो सक्षम है, लेकिन सुरक्षा नियंत्रण कमजोर है। अच्छी कंपनियां इसमें मजबूत ऑथेंटिकेशन देती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यूजर्स अपने फोन से बैट्री को कनेक्ट करके सुरक्षित करें या मैकेनिक से ब्लूटूथ एक्सेस को बंद करवायें।
क्या सिर्फ ई-रिक्शा ही खतरे में हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह खतरा सिर्फ ई-रिक्शा तक सीमित नहीं है। आजकल इलेक्ट्रिक कारें, स्कूटर और स्मार्ट बैट्री सिस्टम, सभी में ब्लूटूथ और ऐप कनेक्टिविटी का इस्तेमाल होता है। अगर सुरक्षा कमजोर हो, तो वाहन नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। डेटा चोरी और प्राइवेसी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
तेजी से बढ़ता EV बाजार और बढ़ती चुनौती
आंकड़ों के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण लगातार बढ़ रहा है:
- 2023: 9.79 लाख वाहन
- 2024: 13.55 लाख वाहन
- 2025: 16.23 लाख वाहन
- 2026 (मार्च तक): 3.76 लाख वाहन
दिल्ली जैसे शहरों में ही करीब 2.46 लाख ई-रिक्शे पंजीकृत हैं।
पहले भी बैन हो चुके हैं कई चीनी एप्स
भारत सरकार इससे पहले भी सुरक्षा कारणों से कई चीनी एप्स पर कार्रवाई कर चुकी है:
- 2020 में 59 एप्स बैन
- बाद में 47 और 118 एप्स पर कार्रवाई
- 2022 में 54 एप्स पर प्रतिबंध
इनमें TikTok, PUBG, WeChat और कई लोकप्रिय एप्स शामिल रहे हैं।
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