गोवा : गोवा के पणजी के होटल ग्रैंड में उच्च स्तरीय नेशनल मेडिकल सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार 22 से 25 मार्च तक चला। सेमिनार का आयोजन नेशनल मेडिकल सेमिनार आयोजन समिति एवं केंट फार्मास्युटिकल्स द्वारा किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य असाध्य, जटील, लाइलाज व बार-बार होने वाली नए व पुराने बीमारियों में कौन सी दवा कितना जल्द काम करता है पर सार्थक चर्चा करना। कोरोना, जैसे जानलेवा वायरस, किडनी फेलियोर, तरह-तरह के पारालाइसीस, ब्रेन हेमरेज, ह्रदय रोग एवं ऑटोइम्यून डिजीज, सिरोसिस ऑफ लिवर, इंटरस्टिसियस लंग डिजीज, स्ट्रोक आदि बीमारियों के इलाज के संबंध में चर्चा की गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आये एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। सेमिनार में विशेष रूप से एलोपैथिक के साथ-साथ होम्योपैथिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं यूएस पॉलीक्लिनिक रांची के मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉक्टर यूएस वर्मा को आमंत्रित किया गया था। डॉक्टर वर्मा ने अपने अनुसंधान एवं अनुभव को साझा किये। डॉक्टर वर्मा ने बताया कि एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, युनानी सिद्धा जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां है। उसमें कुछ ना कुछ कमियां है, कोई भी चिकित्सा पद्धति पूर्ण नहीं है, बल्कि एक-दूसरे का बहुत हद तक पूरक है। इसमें गहन अनुसंधान की आवश्यकता है। कुछ ऐसे भी नए रोग सामने आए हैं, जिसे पूर्व में नहीं देखा गया था। एलोपैथिक इलाज ऑपरेशन, इमरजेंसी मैनेजमेंट में जहां प्रथम स्थान ग्रहण किए हुए है। वहीं पुराना, जटील, असाध्य रोग, चर्म रोग, मानसिक बीमारियों, किडनी, लिवर, हृदय, पीसीओडी, ज्वाइंट पेन, बवासीर, एनल फिशर, वायरस रोगों पर होम्योपैथी असरदार है।
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