Kohramlive : हिन्दू परिवारों में मंदिर केवल आस्था का स्थान नहीं, बल्कि ऊर्जा और शांति का केंद्र माना जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि अगर पूजा घर से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां भी हो जायें, तो घर में तनाव, बीमारी और आर्थिक संकट तक का साया मंडरा सकता है। पूजा घर के लिये उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे शुभ माना गया है। पूर्व दिशा भी सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। दक्षिण और पश्चिम दिशा में मंदिर रखना अशुभ माना गया है।
खंडित मूर्तियों से बचें
- टूटी-फूटी या खंडित मूर्तियों की पूजा करने से देवताओं की कृपा कम हो जाती है।
- ऐसी मूर्तियों को मंदिर में रखना नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रण देना है।
- बेडरूम, बेसमेंट और भंडार गृह में मंदिर बनाना अशुभ।
- ऐसे स्थानों पर बने मंदिर रिश्तों में तनाव और मानसिक अशांति लाते हैं।
- पूजा घर हमेशा खुले, हवादार और साफ-सुथरे स्थान पर होना चाहिये।
सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत
सही स्थान और नियमों के अनुसार बनाया गया पूजा घर घर के हर कोने में शांति, समृद्धि और आशीर्वाद फैलाता है।
डिसक्लेमर – इस लेख की जानकारी धर्मग्रंथों, मान्यताओं और वास्तु विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी निर्णय से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
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