Kohramlive : गुजरात के वडनगर के छोटे स्टेशन से चाय बेचने वाला बालक, आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति का नायक है। संघर्ष उसकी पहचान रहा, संकल्प उसकी ताकत और सेवा उसका धर्म। आज जब वह 75वें पड़ाव पर खड़े हैं, पूरा देश उनके जीवन को एक जीवित महाकाव्य की तरह देख रहा है, जहां हर अध्याय संघर्ष से शुरू होकर उपलब्धि पर खत्म होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को 75 वर्ष के हो जायेंगे। इस अवसर पर वे मध्य प्रदेश के धार में एक विशाल टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन करेंगे। वहीं भाजपा पूरे देश में 16 दिवसीय “सेवा पखवाड़ा” अभियान की शुरुआत करेगी।
वडनगर से दिल्ली तक की यात्रा
1950 में गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी का रेलवे स्टेशन की चाय की दुकान से सफर शुरू किया। 1967 में घर छोड़कर हिमालय, ऋषिकेश और रामकृष्ण मिशन की यात्रायें की। 1972 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े।1975 में इमरजेंसी के दौरान भूमिगत रहकर संघर्ष किया। 1987 में भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाई, अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में जीत दिलाई। 1990 की राम रथ यात्रा और 1991-92 की एकता यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1995 में भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बने। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। लगातार चार कार्यकाल तक गुजरात की सत्ता संभाली। शिक्षा, ई-गवर्नेंस और सद्भावना यात्रा जैसे अभियानों से पहचान बनाई।
भारत के प्रधानमंत्री वैश्विक नेता
2014 में प्रधानमंत्री बने, ऐतिहासिक जनादेश मिला। मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, जनधन योजना, डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएं शुरू कीं। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी से चर्चा में आये। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर इतिहास रचा। कोरोना काल में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया। 2024 में अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कराई। 2025 में भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया।








