Ranchi : झारखंड के पुलिस मुख्यालय में आज न कोई थकान थी, न कोई हिचकिचाहट, थी तो बस एक प्रतिज्ञा… एक संकल्प कि ”अब और नहीं।” अब लाल साया झारखंड की हरियाली पर नहीं छायेगा। DGP अनुराग गुप्ता की अध्यक्षता में आज एक हाई लेवल मीटिंग हुई। नक्सल उन्मूलन के मुद्दों पर इस बैठक में लातेहार से लेकर चाईबासा, पलामू से लोहरदगा तक, हर जिले की फाइलें खुली थीं, लेकिन इस बार सिर्फ चर्चा नहीं—एक्शन प्लान भी तय किया गया।
DGP अनुराग गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अब नक्सली नाम नहीं, चेहरे होंगे, प्रोफाइल बनेगा, रिकॉर्ड बनेगा, ताकि कोई भी आतंक का चेहरा झारखंड की सुरक्षा से बड़ा न हो पाये। उन्होंने खुफिया नेटवर्क को मज़बूत करने, स्थानीय एजेंसियों से समन्वय, मुखबिरों का उपयोग, और जमानत पर छूटे उग्रवादियों पर विशेष नजर रखने पर जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि ये सब अब केवल बातें नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की ज़मीन पर उतरती हकीकत होगी। तमाम खासकर उग्रवाद प्रभावित जिलों के पुलिस कप्तानों को सख़्त निर्देश दिये कि अब वक्त है मैदान में उतरने का, सख़्त कार्रवाई का और भरोसा दिलाने का कि झारखंड अब डर के साये में नहीं, सुरक्षा की छांव में जियेगा। इस निर्णायक बैठक में राज्य के तमाम पुलिस अधिकारियों की भागीदारी रही। मीटिंग में ADG डॉ. संजय आनंदराव लाठकर, IG अभियान अमोल वेणुकांत होमकर, DIG चंदन झा और जमीनी मोर्चे के नायक—पलामू, हजारीबाग, लोहरदगा, चाईबासा, लातेहार के पुलिस कप्तान सभी की आंखों में एक ही चमक थी, “अब ये जंग आखिरी होगी।”
बैठक में लिये गये ये अहम फैसले
- हर धमकी, हर लेवी मांग के मामले की समीक्षा होगी। कोई पीड़ित चुप ना रहे, हर शिकायत पर FIR हो, यह अब पुलिस की जिम्मेदारी है।
- जिनके खिलाफ केस दर्ज हैं, जो फरार हैं, अब कुर्की जब्ती से बच नहीं पायेंगे।
- नक्सली लूट से बनी हर संपत्ति अब सुरक्षित नहीं, उसे भी चिन्हित कर जब्त किया जायेगा।
- “Know Your Enemy, Know Your Friend”—अब हर थाना, हर जवान को पता होगा कि उसके इलाके में कौन दुश्मन है और कौन साथी।












