पटना : बिहार की राजधानी पटना समेत सूबे के अन्य गंगा घाटों पर गुरुवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। हर ओर हर-हर गंगे का नारा गूंज रहा था। श्रद्धालुओं ने पावन पर्व गंगा दशहरे (Ganga Dussehra) पर सूर्योदय की लालिमा के बीच स्नान किया। साथ ही मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार में सुख शांति की कामना की।
आज ही के दिन पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं मां गंगा
हिंदू पंचांग के अनुसार, हिंदी महीना के ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस दिन गंगा स्नान करके व्यक्ति हर तरह के पापों से मुक्ति पा सकता है। इस साल गंगा दशहरा पर खास संयोग बना है. इस बार गजकेसरी के साथ महालक्ष्मी योग लग रहा है। ऐसे में गंगा स्नान करने और दान करने से दोगुना लाभ मिलेगा।
32 दिन तक भगवान शिव की जटाओं में विचरण करती रहीं गंगा
कहा जाता है क ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से गंगा की धारा छोड़ी और शिव ने उसे अपनी जटाओं में समेट लिया। जिस दिन गंगा ने शिवजी की जटाओं में प्रवेश किया, वो वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। इसके बाद 32 दिन तक गंगा भगवान शिव की जटाओं में विचरण करती रहीं। फिर राजा भागीरथ और सभी देवों ने शिव से गंगावतरण के लिए आग्रह किया। शिवजी ने ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को अपनी एक जटा को खोल दिया और गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हो गया।
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