Ranchi (Rupam) : “यह वीडियो देख रही हो न, बाकी बताने की जरूरत नहीं। 20 हजार रुपये की जरूरत है, मोबाइल लेना है, बहुत ठंडा है, गरम कपड़ा जरूरी हो गया। पैसा पहुंचा देना, वरना यही हाल यहां बंद तेरे बेटे का करूंगा। वैसे भी तेरा बेटा सिंगल चेचिस है।” यह कहना है इशरत जहां का। इशरत का बेटा रांची के डुमरदगा बाल सुधार गृह में बीते दो माह से बंद है। इशरत ने कहा- यह वीडियो उनकी बेटी के मोबाइल पर आया था। तब बेटी ने कहा था… भैया ऐसा मत करना, मेरे भाई को मत मारना। तब फोन करने वाले ने कहा था… भैया मत बोलो- दोस्त बनो।
रिमांड होम में बंद बेटे की चिंता में डरी-सहमी इशरत इस बात की जानकारी कर्मचारियों और प्रभारी को भी दी। तब सबने उनसे यही कहा- वह लोग बहुत बदमाश है। उनसे बतियाना छोड़ दें। इशरत का इल्जाम है कि शिकायत के बाद उसके बेटे को कंबल ओढ़ा कर रजाई की तरह धुन दिया गया। नतीजा… उसे रिम्स में भर्ती कराना पड़ा। मां का दावा है कि उसे अल्सर है और आंत में चोट लगी है।
वहीं बाल संप्रेषण गृह के प्रभारी देवी प्रसाद का कहना है कि उसके बेटे को बवासीर है, इस वजह से उसके पाखाना में खून आ रहा है। रिम्स में 5 दिन भर्ती था। ऑपरेशन कराने को राजी नहीं था, नतीजा अब भी उसे यह रोग सता रहा है।
इशरत जहां ने कहा- 3 दिन पहले बाल सुधार गृह से बाहर निकले एक लड़के ने उससे कहा- आंटी अपने बेटे को बाहर निकाल लो, उसके साथ गलत हो रहा है। रोज मार खाता है। वहीं सदर के थानेदार श्याम किशोर महतो ने बताया कि जो वीडियो इशरत को भेजा गया, वह काफी पुराना है। जिस बंदी को पीटा जा रहा है, वह लड़का बीते सितंबर माह में ही बाल सुधार गृह से बाहर निकल चुका है। यह बंदी एक दफा यहां से भाग गया था। बाद में पकड़ा गया था। दोबारा रिमांड होम में भेजे जाने पर कुछ लड़कों ने उसकी पिटाई की थी। यह बोलकर उसे पीटा गया था कि भागते हो तुम, टॉर्चर होते हैं हमलोग। वैसे रिमांड होम के अंदर दादागिरी करने वाले सभी बाल कैदियों की पहचान कर ली गई है। इसमें से दो गांजा, चरस मंगाकर पीता था। इन दोनों पर अलग से भी केस दर्ज है।
वहीं यहां के कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान से कहा कि यहां की हालत बहुत खराब । कुछ बाल कैदियों की गुंडागर्दी चरम पर है। यहां से निकलकर जाने वाले बंदियों का सामान तक वापस नहीं किया जाता। गिने चुने कुछ बाल कैदियों की यहां हुकूमत चलती है। जब जो चाहा कर लिया, जब जिसे चाहा पीट दिया। यहां तक कि अंदर पहरेदार की पोस्टिंग भी उनकी मर्जी से होती है। गांजा, चरस, सिगरेट, खैनी से लेकर कई तरह की नशीले चीजें का यहां बेखटके पहुंच जाती है। आये दिन रांची पुलिस रिमांड होम के अंदर सबकुछ खंगालती भी है। कुछ दिन ठीक रहता है, फिर शुरू हो जाती है मनमानी। जिन बंदियों की जेब में पैसा है, उन्हें यहां कोई दिक्कत नहीं। मोबाइल रखने की खुली छूट पाना बहुत मुश्किल काम नहीं।












