Ranchi : झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी को पर्यटन स्थल घोषित करने का पूरे देश में विरोध हो रहा है। पारसनाथ पहाड़ी दुनिया भर के जैन धर्मावलंबियों के बीच सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखरजी के रूप में विख्यात है। जैन समाज का स्पष्ट कहना है कि पर्यटन स्थल घोषित होने से इस पूज्य स्थान की पवित्रता भंग होगी। मांस भक्षण और मदिरा पान जैसी अनैतिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे अहिंसक जैन समाज की भावना आहत होगी। इस बीच झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पारसनाथ को तीर्थस्थल घोषित करने का आग्रह किया है। राज्य सरकार की ओर से भी भरोसा दिलाया गया है कि पारसनाथ की पवित्रता बरकरार रहेगी। राज्य के पर्यटन, कला, संस्कृति और खेलकूद विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जैन धर्मावलंबियों की भावना का ध्यान रखते हुए यहां मांस-शराब पहले से पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सरकार ने गिरिडीह जिले के डीसी को निर्देश दिया है कि यह प्रतिबंध प्रभावी तरीके से लागू हो।
27 जनवरी से 3 फरवरी तक होगा सम्मेलन
नई दिल्ली में इंडिया गेट के अलावा देश की अलग-अलग जगहों पर जैन समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच 27 जनवरी से 3 फरवरी तक जैन धर्मावलंबियों का पारसनाथ में धार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हो सकती है।
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