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ट्रेन में ऐसे भी आ सकती है मौ*त, डरा गया हर मुसाफिरों को… देखें कैसे

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KohramLive : सहसा आपको यकीन नहीं होगा, पर यह सच है कि मौत ऐसे भी आ सकती है। 110 की स्पीड से भाग रही नीलांचल एक्सप्रेस ट्रेन की खिड़की से मौत आई और पलभर में हरिकेश दुबे का राम नाम सत्य हो गया। यह दृश्य देख हर कोई दंग था। सबकी जुबां पर एक ही बोल, मौत ऐसे भी आ सकती है। लगभग 34 साल के मुसाफिर हरिकेश दुबे को दम तोड़ते कई लोगों ने अपनी आंखों से देखा। इस भयानक मंजर के कई चश्मदीद गवाह।

हुआ यूं कि नीलांचल एक्सप्रेस ट्रेन आज सुब अलीगढ़ के सोमना और डांबर रेलवे स्टेशन के बीच जोरदार रफ्तार से जा रही थी। अचानक जनरल कोच का शीशा तोड़ते हुये पटरी किनारे पड़ी लोहे की रॉड मुसाफिर हरिकेश दुबे के गर्दन के आर-पार हो गई। इस मुसाफिर के बगल वाली सीट पर एक महिला मुसाफिर बैठी हुई थी। वो किस्मत से बच गई। खून से लथपथ डेड बॉडी के साथ बाकी सहमे यात्रियों ने अलीगढ़ तक सफर किया। यह हृदय विदारक घटना मुसाफिरों को अंदर तक हिला कर रख दिया। हर कोई डरा सहमा था। डर इतना हो गया था कि खिड़की के पास बैठे मुसाफिर अपनी जगह छोड़ किनारे पकड़ लिये। उनके मन में यह भय सता रहा था कि कहीं दोबारा ऐसा किसी के साथ ना हो जाये। वहीं कोच में फर्श पर खेल रहे छोटे-छोटे बच्चों को उनकी मां ने गोद में उठा लिया। आंचल उनका कवच बना। ट्रेन को अलीगढ़ पहुंचने में करीब 33 मिनट लग गये। 33 मिनट खौफ के साये में मुसाफिरों का गुजरा। इस हादसे में मारे गये हरिकेश दुबे सुल्तानपुर के रहनेवाले थे।

इस भयानक मंजर के चश्मदीद गवाह और इसी कोच में सफर कर रहे शैलेंद्र मिश्र एवं विनय ने मीडिया को बताया कि ट्रेन डाबर स्टेशन के पास से गुजर रही थी, तभी अचानक जोरदार आवाज के साथ एक लोहे की रॉड खिड़की के लगे शीशे को तोड़ते हुये सीधे सीट नंबर 15 में बैठे मुसाफिर की गर्दन के आर-पार होकर प्लाईबोर्ड में जा घुसी। वो खून से लथपथ हो गया। थोड़ी देर छटपटता रहा, फिर उसकी सांसों की डोर टूट गई। इसके बाद ट्रेन को चेन पुलिंग कर रोका गया और रेलवे स्टाफ को सबकुछ बताया गया। गोली की रफ्तार से घुसी थी रॉड। कुछ मुसाफिरों का कहना था कि जब चलती ट्रेन में इस कदर का हादसा हो सकता है तो सफर करने वाले यात्री कितने सुरक्षित रहेंगे, इसे समझा जा सकता है। रेलवे की लापरवाही और अनदेखी का नतीजा है यह हादसा। दोषियों को इसकी सजा जरूर मिलनी चाहिये। मुसाफिरों की सुरक्षा पर रेलवे को ज्यादा गौर करने की जरूरत है।

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