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हा’दसों का अड्डा बनी दनुवा घाटी

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Chouparan(Krishna Paswan) : शाम के झुटपुटे में जब सूरज दनुवा की पहाड़ियों के पीछे सिमट रहा था, तब घाटी की खामोशी एक तेज ब्रेक की आवाज से चीर दी गई। पहियों की चरमराहट, लोगों की चीखें और फिर एक के बाद एक टक्कर… ऐसा लगा जैसे दनुवा घाटी अपने सीने में छुपी बदनसीबी को उगल रही हो। पटना से कोलकाता की तरफ जा रहा एक ट्रक जैसे ही घाटी के उस मोड़ पर पहुंचा, जहां कभी पीपल का एक पुराना पेड़ था, उसी जगह एक ट्रेलर से टकरा गया। लोहे की केबिन में फंसा उसका ड्राइवर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। मौके पर पहुंचे थानेदार अनुपम प्रकाश ने क्रेन की मदद से फंसे चालक को बाहर निकाल हॉस्पिटल भेजा। दूसरी घटना में एक गाड़ी जिसमें ताशा पार्टी के लोग थे, तेजी से गया की ओर निकल रही थी। बैंड-बाजे की गूंज अभी पीछे ही छूटी थी, कि सड़क ने उन्हें पलट दिया। शिवा कुमार, अर्जुन और पीयूष के खून से लथपथ गाड़ी चुपचाप गवाह बन गई,  शादी से पहले मातम भी दस्तक देता है। तीसरी घटना में एक ट्रेलर, ओवरलोड और बेपरवाह, सीधे जा गिरा 40 फीट गहरी खाई में। लोहे के जिस्म से निकलती कराहती आवाजें घाटी के हर पत्थर को कंपा रही थीं। चौथी घटना में एक तेज रफ्तार कार, सीधे एक कंटेनर में जा घुसी। कंटेनर रेलिंग तोड़ते हुये हवा में लटक गया। नूर हसन, मुद्रिका मेहता, अनिमेष यादव… और प्रकाश कुमार, किसी ने हजारीबाग से जिंदगी का सफर शुरू किया था, कोई यूपी से लौट रहा था, लेकिन दनुवा ने सबको एक ही मोड़ पर लाकर रोक दिया। डॉक्टरों ने चार को रेफर कर दिया।

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