Garhwa(Nityanand Dubey) : गांव की गलियों में बच्चों के पैरों तले उड़ती धूल गवाही दे रही है कि यहां कोई कूप नहीं बना, कोई गाय शेड खड़ा नहीं हुआ और आम का कोई पौधा पत्ता तक नहीं हिला। यह कहानी है गढ़वा के रंका प्रखंड के कंचनपुर पंचायत की, जहां खेतों की हरियाली का सपना दिखाकर 1.47 करोड़ 89 हजार रुपये की निकासी कर ली गई। ना किसान मुस्कराया, ना मजदूर को काम मिला…मगर वेंडरों के खातों में नोटों की नदियां बह निकलीं। गुजरे दो साल में सैंकड़ों योजनायें आई, मगर जमीन अब भी प्यास से दरकी है। वर्ष 2020-21 में 72 योजनाएं, 2021-22 में 97 योजनाएं, इनमें कूप निर्माण, गाय शेड, डोभा, आम बागवानी और मिट्टी सड़क जैसी योजनाएं शामिल थीं। लेकिन धरातल पर? कई योजनाएं अधूरी, कुछ कागजों तक ही सजी, और कुछ आंखों से ओझल। विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि “यहां के अफसर 50% घूस लेते हैं। डीसी फोन नहीं उठाते, शायद डरते हैं कि भ्रष्टाचार की पोल न खुल जाये।”
“बिरसा हरित ग्राम योजना” में बगावत
DDC ने आम बागवानी के पौधों, खाद और कीटनाशक पर राशि खर्च करने का निर्देश दिया था, लेकिन चार अक्टूबर 2024 को 81.62 लाख रुपये, कूप निर्माण और गाय शेड में बांट दिये गये। नियमों की चिता जलाई गई और उसमें जलकर राख हो गये गांव के सपने।
और फिर शुरू हुआ “वेंडर वॉर”
सरकारी खजाने से सीधे खातों में, नामों के साथ रकम भी दर्ज है:
- श्रीराम ओझा – ₹34,18,822
- जितेन्द्र यादव – ₹53,49,943
- अंबिका सिंह – ₹55,26,233
- श्री अग्रसेन इंटरप्राइजेज – ₹35,15,654
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