UP : “कॉलेज तेरे बाप की धर्मशाला नहीं है…” ये शब्द मुजफ्फरनगर के डीएवी कॉलेज बुढ़ाना के प्राचार्य प्रदीप कुमार के थे और इन्हीं शब्दों ने BA द्वितीय वर्ष के छात्र उज्ज्वल राणा की दुनिया उजाड़ दी। उज्ज्वल ने बस इतना कहा था कि “सर, कुछ दिन मोहलत दे दीजिये, गन्ने का भुगतान मिलते ही फीस जमा कर दूंगा।” लेकिन संवेदना की जगह तानों ने ली और तानों के बाद थप्पड़ों ने। इल्जाम है कि प्राचार्य ने उसे धक्के देकर ऑफिस से निकाला, पीटीआई संजीव कुमार से पिटवाया, फिर पुलिस को बुलाया, जहां SI नंद किशोर, सिपाही ज्ञानवीर और विनीत ने भी पिटाई कर दी। और वही जुमला दोहराया “कॉलेज को धर्मशाला समझ रखा है क्या?” अपमान से टूटा उज्ज्वल कॉलेज परिसर से बाहर नहीं गया। उसने वहीं पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। शरीर जल रहा था, चीत्कारें गूंज रही थीं, लेकिन अमानवीयता की हद देखिये, प्राचार्य ने कहा, जो बचाने आयेगा, उसे कॉलेज से निकाल दिया जायेगा। फिर भी कुछ छात्रों ने दौड़ लगाई, उनके हाथ, उनके बैग जल गये, लेकिन उज्ज्वल का शरीर आग में समा गया। उसे पहले बुढ़ाना, फिर मेरठ, और आखिर में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। जहां 80% झुलसे उज्ज्वल ने दम तोड़ दिया।
मरने से पहले उज्ज्वल का आखिरी वीडियो
मरने से पहले उज्ज्वल ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया। उसकी आवाज कांप रही थी, पर शब्द आग थे, “प्राचार्य प्रदीप कुमार ने मुझे गाली दी, बाल नोंचे, पीटा पुलिस ने भी गालियां दीं। मैंने गरीब छात्रों के हक की बात की, पर मुझे डराया, धमकाया गया। अगर मैं आत्महत्या करता हूं तो इसका दोष प्राचार्य और पुलिसकर्मियों पर होगा।” यह वीडियो आज सिस्टम के चेहरे पर आईना बन गया है। अगले ही दिन जनपद जाट महासभा के नेतृत्व में डीएवी कॉलेज के सामने धरना हुआ। “उज्ज्वल को इंसाफ दो” के नारे गूंजे। आक्रोशित भीड़ ने कोतवाली का घेराव किया और पुलिस की लापरवाही पर सवाल खड़े किये। धरने में युवा रालोद, छात्र संगठन और स्थानीय नेता सब शामिल हुये। हर चेहरे पर सवाल था, क्या एक गरीब छात्र की जिंदगी सिर्फ पांच हजार की कीमत रखती है? उधर, कॉलेज प्रबंधक अरविंद गर्ग ने मीडिया से कहा कि “आरोप बेबुनियाद हैं। बस आधी फीस जमा कराने को कहा गया था।” जबकि प्राचार्य प्रदीप कुमार बोले, “मैंने खुद पुलिस को बुलाया था, कोई मारपीट नहीं हुई।” पर उज्ज्वल के जलते शरीर की गवाही अब हर दीवार दे रही है इधर, बागपत के भड़ल में रहनेवाला उज्जवल होनहार छात्र, जो ईमानदारी से पढ़ाई करता था, सिर्फ 5000 रुपये की फीस के लिये खुद को जिंदा जला लिया। उसकी बहन सलोनी ने कहा कि “मेरे भाई ने मौत नहीं चुनी, सिस्टम ने उसे मरने पर मजबूर किया।”




