Ranchi : CM हेमंत सोरेन ने रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की। बैठक का मुख्य फोकस हाथियों के हमलों से आम लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा था। CM ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि किसी भी हाथी हमले में किसी व्यक्ति की मौत न हो। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में तुरंत प्रभावी कदम उठाये जायें और ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जाये। CM ने कहा कि हाथियों के हमले में किसी भी व्यक्ति की मौत या संपत्ति की हानि होने पर 12 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाये। मुआवजा देने में कोई देरी न हो। प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को एलीफेंट रेस्क्यू और हाथियों को भगाने की तकनीकी ट्रेनिंग दी जायेगी। इसके लिए मशाल, टॉर्च, सोलर सायरन, डीजल और पुराने टायर उपलब्ध कराये जायेंगे। हाथियों के हमलों को रोकने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया जायेगा। पहले ही 70 लोगों की टीम सक्रिय है, और छह कुंकी हाथियों को ट्रैकिंग सिस्टम में मदद के लिए लाया जा रहा है।
डेटा और मैपिंग
बीते 5 वर्षों का कैजुअल्टी और मुआवजा डेटा सरकार को उपलब्ध कराया जायेगा। पूरे राज्य में एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग की जायेगी। सभी जान-माल हानि मामलों में नियमों को अपडेट कर तेज राहत सुनिश्चित की जायेगी।
हाथियों के हमलों पर गंभीर चिंता
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के महीनों में राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला, दुमका जिलों में हाथियों के हमलों से लगभग 27 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही, ग्रामीणों की फसल और पशुधन भी प्रभावित हुये हैं। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष गंभीर विषय है और सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। प्रभावित लोगों को त्वरित राहत और न्यायसंगत मुआवजा देना हमारी प्राथमिकता है।
आगे की रणनीति
एलीफेंट रेस्क्यू सिस्टम को विशेषज्ञों की मदद से और मजबूत किया जायेगा। ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय और जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। हाथियों के विचलन को रोकने और बचाव के लिए सभी तकनीकी और स्थानीय उपाय लागू किये जायेंगे। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्रीय वन अधिकारी उपस्थित थे।









