Garhwa(Nityanand Dubey) : जंगल की सन्नाटों से निकलकर समाज की रौशनी में लौटने वालों के लिये अब नई सुबह सज रही है। गढ़वा में आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में प्रशासन ने कदम और तेज कर दिये हैं। समाहरणालय सभागार में DC दिनेश यादव की अध्यक्षता में पुनर्वास एवं स्क्रीनिंग समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें साफ संदेश दिया गया कि अब देर नहीं, पुनर्वास लाभ हर हाल में जल्द दें। बैठक में DC ने दो टूक कहा कि पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले जो भी लाभ लंबित हैं, उनका निष्पादन युद्धस्तर पर किया जाये। उन्होंने कहा, हिंसा का रास्ता छोड़ लौटे लोगों को समाज की मुख्यधारा में पूरी गरिमा के साथ जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है, इसमें किसी तरह की देरी स्वीकार नहीं होगी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि आत्मसमर्पण केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हिंसा से उम्मीद की ओर लौटने की यात्रा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इन लोगों को सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित किया जाये।
आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेंगी ये सुविधायें
- पुनर्वास अनुदान व घोषित पुरस्कार राशि का भुगतान
- स्वरोजगार के लिये आर्थिक सहायता
- व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा
- परिवार के लिये जीवन बीमा सुरक्षा
- लंबित मामलों में अधिवक्ता शुल्क का भुगतान
- सरकारी चिकित्सा सुविधा
- बच्चों के लिये शैक्षणिक सहायता
इन योजनाओं के जरिये प्रशासन उन्हें नया जीवन, नया सम्मान और नया रास्ता देने की तैयारी में है।
जिले में अब तक 12 आवेदन
प्रभारी पदाधिकारी (जिला सामान्य शाखा) सुशील कुमार राय ने बताया कि गढ़वा जिले में अब तक पुनर्वास नीति के तहत कुल 12 आवेदन प्राप्त हुये हैं। इन सभी मामलों की अद्यतन स्थिति से उपायुक्त को अवगत कराया गया और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिये गये। बैठक में पुलिस कप्तान अमन कुमार, उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, अपर समाहर्ता राज महेश्वरम, जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, डीएसपी यशोधरा, सिविल सर्जन डॉ. जे.एफ. कैनेडी और जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज समेत कई अधिकारी मौजूद थे।






