Kohramlive : सुबह की हल्की ठंडक, धूप की सुनहरी धार और सरोवर के जल में थिरकती तरंगें, यहीं से शुरू होती है बुंडू सूर्य मंदिर की भक्ति यात्रा। जैसे ही सूर्य की पहली किरण जल को छूती है, घाट पर जीवन का संगीत बज उठता है। रांची से सटे बुंडू सूर्य मंदिर में दूर-दूर से आये श्रद्धालु, अपने मन के संकल्प, अरमान और विश्वास को थामे धीरे-धीरे घाट की ओर बढ़ते हैं। हर कदम पर एक अदृश्य सुकून उतरता है, हर चेहरे पर झलकती है किसी गहरी आस की रोशनी। तीस वर्षों से संस्कृति बिहार ट्रस्ट और मंदिर समिति बिना किसी दिखावे के, बस एक भाव से सेवा कर रही है, “हर व्रती को सुविधा मिले, हर श्रद्धालु को सुकून।”
मुख्य पुजारी से लेकर समिति से जुड़े हर शख्स सुबह से लेकर रात्रि तक घाट के हर कोने में नजर रखते हैं कि कोई व्रती असुविधा महसूस न करे। उनकी निगरानी में यह मंदिर सेवा, अनुशासन और संवेदना की जीवित प्रतिमा बन चुका है। रात्रि उतरती है तो सरोवर किनारे हजारों परिवारों के दीप झिलमिला उठते हैं। जल पर तैरते दीये जैसे कह रहे हों, “हर अंधकार मिटे, हर मन उजले।” तालाब में गोताखोर अलर्ट मोड में रहते हैं। हर वर्ष जब सूर्य सरोवर से झांकता है,
तो उसकी किरणों में झिलमिलाता दिखता है यह संदेश “भक्ति तभी पूर्ण होती है, जब उसमें प्रेम और सेवा का संगम हो।”










