नई दिल्ली: दिल्ली से वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन का सपना जल्द हकीकत बनने जा रहा है। रविवार से इस परियोजना का हवाई सर्वे शुरू हुआ है। यह सर्वेक्षण Light Detection and Ranging Survey तकनीक के जरिए किया जा रहा है।
क्या है LiDAR तकनीक
दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर के सर्वे के लिए LiDAR तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक बेहद एडवांस तकनीक है, जिसमें एक हेलीकॉप्टर के ऊपर लेजर से लैस उपकरण लगे होते हैं, जिसके जरिए जमीन पर मौजूद हर चीज का डिटेल में विवरण मिलता है। इस तकनीक का इस्तेमाल मुंबई-अहमदाबाद रेल कॉरिडोर के सर्वे के लिए किया जा चुका है।
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इस तकनीक में लेजर डाटा, GPS डाटा, फ्लाइट पैरामीटर और वास्तविक फोटोग्राफ भी मिलते हैं, जिसकी वजह से डाटा बिल्कुल सटीक होते हैं। इसकी मदद से कॉरीडोर की लंबाई, चौड़ाई, अलाइनमेंट, स्टेशन, डिपो, जमीन की जरूरत वगैरह का बिल्कुल सही-सही खाका तैयार होता है, जिससे प्रोजेक्ट डिजाइन करना आसान हो जाता है।
LiDAR को दिया गया सर्वे का काम
इस सर्वे का काम रेलवे ने नेशनल हाईस्पीड रेल को-ऑपरेशन लिमिटेड को दिया है। LiDAR तकनीक से आसमान से ही जमीन पर बनने वाले रास्तों का सर्वेक्षण किया जाता है, जिसमें जानकारी मिलती है कि जमीन पर रास्ता कैसा है, कहां गड्ढे हैं, कहां ऊंचाई है या फिर कहां नदी और नाले हैं। रास्तों में कितनी इमारतें हैं और बस्तियों, झुग्गियों का स्ट्रक्चर कैसा है। ये सभी सामान्य तरीके से जमीन पर जाकर इकट्ठा किया जाए तो इसमें 10-12 महीने का वक्त लग जाता है, जबकि LiDAR तकनीक से ये काम सिर्फ 12 हफ्ते में किये जा सकता हैं।
सिर्फ ढाई घंटे में दिल्ली से रामलला के दर्शन
दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 865 किलोमीटर लंबा है। इसके रास्ते में मथुरा-आगरा-इटावा-लखनऊ-रायबरेली-प्रयागराज-भदोही जैसे कई शहर पड़ेंगे. बुलेट ट्रेन से जितना फायदा इस रूट से सीधे जाने वाले यात्रियों को होगा, उतना ही फायदा अयोध्या दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी होगा।
दिल्ली से वाराणसी के बीच में अयोध्या को भी स्टॉप बनाने की योजना तैयार की गई है। ऐसे में दिल्ली से अयोध्या के बीच 700 किलोमीटर की दूरी महज दो से ढाई घंटे में सिमट जाएगी। आम तौर पर दिल्ली से अयोध्या ट्रेन से जाने में 10 घंटे लगते हैं। नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से होते हुए बुलेट ट्रेन अयोध्या नगरी को भी जोड़ेगी।
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