Patna : मिथिलांचल और मैथिली भाषियों के लिए एक बड़ी और गर्व की खबर सामने आई है। अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल कर लिया गया है। यानी आने वाले दिनों में बच्चे अपनी मातृभाषा मैथिली को स्कूलों में पढ़ सकेंगे। इस फैसले को मिथिला की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई जाएगी मैथिली
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत मैथिली को कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दी गई है। इस संबंध में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दरभंगा सांसद गोपालजी ठाकुर को पत्र लिखकर आधिकारिक जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताई खुशी
इस फैसले पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्रीय मंत्री का पत्र साझा करते हुये इसे मिथिला की सांस्कृतिक विरासत और भाषाई अस्मिता के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया। CM ने लिखा कि “मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान मिलना मिथिला के लोगों के लिए गर्व का विषय है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण को मजबूती मिलने की बात भी कही। इस फैसले का सबसे बड़ा असर आने वाली पीढ़ियों पर देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि मातृभाषा में शुरुआती शिक्षा मिलने से बच्चों की समझने और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। साथ ही वे अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहते हैं।
NCERT भी कर रहा तैयारी
पत्र के मुताबिक, NCERT ने समीक्षा के बाद सिफारिश की है कि 5वीं तक और संभव हो तो 8वीं तक मैथिली को शिक्षा का माध्यम बनाया जाये। इसके अलावा NCERT की किताबों का मैथिली समेत 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी किया जा रहा है। बताया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मैथिली का पाठ्यक्रम तैयार कर CBSE की वेबसाइट पर उपलब्ध भी करा दिया गया है।
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