लखनऊ : बड़े सपने ने महिला सिपाही रूचि चौहान को मौत की आगोश में ले लिया। अपने बड़े सपने की वजह से रूचि ने पहले साथी सिपाही नीरज से प्रेम विवाह किया। फिर फेसबुक के जरिये तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव से उसकी जान पहचान हुई। प्रतापगढ़ में अपने एक करीबी के जमीनी विवाद में मदद ली। फिर दोनों के बीच दोस्ती ऐसी बढ़ी कि मिलना-जुलना शुरू हो गया। धीरे-धीरे रूचि तहसीलदार पद्मेश के इतने करीब आ गई कि उसके साथ जीवन बिताने के सपने देखने लगी। उसने अपने पति नीरज को तलाक देने के लिए कोर्ट में अर्जी भी दाखिल कर दी। इसी महीने उसका फैसला भी आने वाला था।
पद्मेश भी रूचि के प्यार में पागल होने लगे। पत्नी को इलाहाबाद में छोड़कर रूचि से मिलने लखनऊ आने लगे। चर्चा है कि बाराबंकी में थाने की ड्यूटी से रूचि को डीजीपी मुख्यालय में संबद्धता भी पद्मेश ने ही करवाई, ताकि मिलने में कोई परेशानी न हो। लखनऊ में पुलिस मुख्यालय में संबद्धता होने से शनिवार और रविवार को अमूमन छुट्टी मिल जाने से दोनों के मुलाकात आसान हो गया। मगर इन मुलाकातों ने रूचि के सपनों को हवा दे दी। रूचि पद्मेश का ख्वाब देखने लग गई। उसने पद्मेश पर शादी के लिए दबाव बनाने लगा। जिसके बाद परेशान होकर पद्मेश ने पत्नी प्रगति ने एक अन्य के साथ मिलकर रूचि को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। पद्मेश और उसकी पत्नी ने रूचि की हत्या में मोहरा नामवर को बनाने की योजना बनाई। दोनों की प्लानिंग थी कि रुचि को मुलाकात के लिए पद्मेश कॉल कर बुलाएंगे जरूर, लेकिन नशे की हालत में उसकी हत्या और लाश को फेंकने का काम नामवर करेगा।
अगर हत्याकांड का खुलासा भी होता है तो पकड़ा नामवर जायेगा। तय योजना के मुताबिक 12 फरवरी की शाम पद्मेश ने रुचि को फोन कर मुलाकात के लिए पीजीआई इलाके में बुलाया। जिस गाड़ी में रुचि और पद्मेश बैठे थे, वह नामवर की थी। नामवर ने ही पीजीआई में एक जूस कॉर्नर से अनार का जूस में अल्प्रेक्स की 10 गोलियां मिलाकर रुचि को दी। जब रुचि बेहोश हो गई तो उसकी हत्या कर नामवर ने अपनी ही कार से रुचि की लाश नाले में फेंक आया। मगर नामवर की एक गलती की वजह से तहसीलदार पद्मेश और उसकी प्रगति श्रीवास्तव भी फंस गई। नामवर ने घटनास्थल से रुचि का फोन स्विच ऑफ किया और फिर वहीं से प्रगति को फोन कर बताया काम हो गया है। पुलिस की जांच में अंतिम बार रुचि की तहसीलदार से की गई बात और फिर जिस जगह और जिस वक्त पर रुचि का मोबाइल बंद हुआ, ठीक वहीं से तहसीलदार की पत्नी के नंबर पर एक कॉल ने पूरे राज से पर्दा उठा दिया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पद्मेश, उसकी पत्नी प्रगति और नामवर ने सारा राज उगल दिये।
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