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आदिवासियों को लोन देने के मामले में अपना स्टैंड क्लीयर करे बैंक : हेमंत सोरेन

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Ranchi: आदिवासियों को लोन देने के मामले में अपना स्टैंड क्लीयर करें बैंक, नहीं तो सरकार कड़ा रूख अपनाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उक्‍त बात आदिवासियों को बैंक से लोन मिलने में हो रही दिक्कतों को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में क‍ही। बैठक यह बात भी सामने आई कि बैंक आदिवासियों को लोन देने से आना-कानी करते है। सीएनटी-एसपीटी कानून की वजह से जमीनों का मॉर्गेज बैंक नहीं करती है। इस कारण आदिवासी बैंक से लोन लेने के चक्कर में चप्पल तोड़ते रह जाते हैं। लोन नहीं मिलने की वजह से वे अपना व्‍यवसाय, उद्योग शुरू नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका विकास नहीं हो पाता है।
बैठक में बैंक प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि वे लोग बैंक बोर्ड मीटिंग में इस पर चर्चा करेंगे। बैंक के आला अफसरों को इससे अवगत करायेंगे। बीस सूत्री अध्यक्ष स्टीफन मरांडी ने कहा राज्य में आदिवासियों को पास सैंकड़ो एकड़ जमीन होने के बाद भी लोन नहीं मिल पाता. ऐसे में बैंक को अपना रुख स्पष्ट करना होगा नहीं तो राज्य सरकार कड़ा रुख भी अपना सकती है।
आदिवासियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखते हुये कार्य करें
बैठक में बोलते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय को ऋण नहीं मिल पाने की समस्या अविभाजित बिहार से चली आ रही है। ऐसी व्यवस्था हो ताकि अनुसूचित जनजाति के लोग व्यवसाय एवं अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इनके पास भूमि है, लेकिन भूमि होने के बावजूद वे उसका उपयोग खुद को आत्मनिर्भर बनाने में नहीं कर पाते। शिकायतें आती है कि उन्हें बैंक से ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता है। यही वजह है, आज इस बैठक का आयोजन किया जा रहा है। अनुसूचित जनजाति समुदाय के 28 प्रतिशत लोग इस राज्य में हैं। अगर अनुसूचित जाति समुदाय को सम्मलित कर लें तो यह 40 प्रतिशत तक जाएगी। ऐसे में उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में हम सभी का सामूहिक प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बैंक आदिवासी समुदाय के लोगों की भूमि छीन लेगी तो, उनका अस्तित्व ही छीन जाएगा। उनके अस्तित्व को सुरक्षित रखते हुए हमें कार्य करना है।
लीक से अलग हटकर विचार करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंक प्रबंधन लीक से अलग हटकर समाधान निकाल सकता है। बैंकों को चाहिए कि भूमि पर ध्यान ना देकर भूमि पर जिस चल-अचल संपत्ति का निर्माण हो, उसे कोलेट्रल के रूप में रखने पर विचार करें तो समस्या का काफी हद तक समाधान निकाला जा सकता है। इसके अतिरिक्त बैंकों को कोलेट्रल फ्री ऋण की अधिसीमाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे आदिवासियों को आसानी से शिक्षा, आवास, व्यवसाय एवं उद्योग लगाने के लिए लोन मिल सके। इस समुदाय के लोग अगर आगे नहीं बढ़ेंगे तो राज्य कैसे विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।
बैठक में मंत्री चंपई सोरेन, विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, वित्त सचिव अजय कुमार सिंह, कल्याण सचिव केके सोन एवं विभिन्न बैंकों के महाप्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक उपस्थित थे।

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