कोहराम लाइव डेस्क : कोरोना से जूझ रही दुनिया में इस वक्त वैक्सीनेशन का काम तेज गति से आगे बढ़ रही है। लेकिन यूरोप के कुछ देशों में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। इसके बाद दुनियाभर में चिंताएं भी बढ़ रही हैं। यह सही है है किवैक्सीन लगने के बाद खून का थक्का जमने के कुछ गंभीर मामले सामने आएहैं। इसके बाद जर्मनी-फ्रांस और इटली जैसे बड़े देशों ने वैक्सीन के उपयोग पर रोक लगा दी है।
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सबसे पहले नीदरलैंड ने लगाई अस्थायी रोक
गौरतलब है कि वर्तमान में एस्ट्रेजेनेका के टीके का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों द्वारा किया जा रहा है। यूरोप के कुछ देशों में इस वैक्सीन के लगने के बाद लोगों में खून का थक्का जमने के कुछ मामले सामने आए थे। इसके बाद सबसे पहले नीदरलैंड ने इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी। एक हफ्ते में देखते ही देखते करीब एक दर्जन देशों ने इस वैक्सीन का इस्तेमाल रोक दिया। अभी तक आयरलैंड, नीदरलैंड, नार्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, कांगो, बुल्गारिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन ऐसे देश हैं, जिन्होंने अस्थायी रूप से एस्ट्रेजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी है।
को-वैक्स के जरिये दी जा रही वैक्सीन में दिक्कत नहीं
वैक्सीन के बारे में WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को संस्था के को-वैक्स मिशन द्वारा कई देशों में भेजा जा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्हें मुफ्त में यह वैक्सीन दी जा रही है। WHO ने साफ कर दिया है कि यूरोपीय देशों में जो वैक्सीन की दिक्कत आ रही है, वो यूरोपीय मैन्युफैक्चर द्वारा तैयार की जा रही एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दिक्कत है। ऐसे में WHO जो को-वैक्स के जरिये वैक्सीन दे रहा है, उसमें कोई शिकायत नहीं है।
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कल होगी महत्वपूर्ण बैठक
यूरोपीय देशों द्वारा वैक्सीन पर अस्थायी रोक लगने के बाद अब यूरोपियन मेडिकल एजेंसी (EMA) ने गुरुवार को एक बैठक बुलाई है। इसमें यूरोपियन देशों में एस्ट्रेजेनेका के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
इंडिया में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा निर्माण
ध्यातव्य है कि इंडिया में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का निर्माण पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है, जो भारत में कोविशील्ड नाम से वैक्सीन बनाई जा रही है। सीरम इंस्टीट्यूट की गिनती दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में होती है।
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